धीरेंद्र शास्त्री बोले- हमारे राम सीधे, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े:कहा- पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं; 5 विवादित बयान, 5 बार सफाई
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण को लेकर विवादित बयान दिया है। शास्त्री ने कहा- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुर जी की खोपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा, चलते और खड़े भी टेढ़े होते हैं। उन्होंने कहा- हमारे वालों का धाम भी सीधा अयोध्या, तुम्हारे वालों का वृंदावन। उन्होंने कहा- भगवान कृष्ण पर्वत उठा लेते हैं तो इसमें क्या बड़ी बात है, हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। शास्त्री ने यह टिप्पणी 28 अक्टूबर को शिवपुरी के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान की थी। ऐसी टिप्पणी पर प्रदीप मिश्रा नाक रगड़कर मांग चुके माफी इससे पहले जून 2024 में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने राधारानी को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था- राधारानी का विवाह भगवान कृष्ण से नहीं, बल्कि मथुरा के छाता निवासी अनय घोष से हुआ था। विवाद के बाद प्रदीप मिश्रा ने बरसाना के राधारानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी थी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- तुमारे वाले ठाकुर जी 3 जगह से टेढ़े धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में बैठे श्रद्धालुओं से कहा- तुमारे वाले तो एक भी फोटो देख लो तुम अपने वाले ठाकुर जी की। एक भी फोटो। बैठे हैं ऐसे तो ऐसे... कहीं ऐसे। तुमारे वाले तो खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कमर कहीं लचकाएं, खोपड़िया ऐसी करें, ऐसी खोपड़िया करें, फिर बंसी बजाएं ऐसे टेढ़े करके। इसके बाद उन्होंने भगवान राम की तुलना करते हुए कहा- हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे। तुमारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं। 'बंसी बजाना खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं' भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बंसी बजाने और धनुष चलाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- बंसी का बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं। इसके बाद उन्होंने कथा में बैठे श्रद्धालुओं से कहा- जितने ठाकुर जी वाले बैठे हैं, आज तो तुम्हारे ठाकुर जी की भी जय-जयकार हो रही है। फिर उन्होंने बंसी बजा रहे कलाकार की ओर इशारा करते हुए कहा- सुनो, तुम्हारे ठाकुर जी क्या करते? बंसी बजाते? तो बंसी कोई बड़ी बात थोड़ी है। शास्त्री बोले- कलाकार बंसी बजा लेते हैं उन्होंने कहा- गायों को चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं। बंसी बजाना कोई बड़ी बात नहीं, हमारे यहां भी कलाकार बंसी बजा लेते हैं। देखो, हमारे यहां तो ये भी बजा रहा है। बजा-बजा, बजा। लो, लो। इसके बाद बांसुरी वादक ने कुछ देर तक बंसी की धुन सुनाई। धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में बैठे लोगों से भगवान राम को मानने वालों के बारे में पूछा, राम जी वाले कितने बैठे हैं हाथ उठाओ। हां! आज तुम लोग फूले नहीं समाओगे। इसके बाद फिर कहा- बंसी का बजाना तो खेल भी है, पर धनुष चलाना खेल नहीं। 'गाय चराना खेल है, बंदरों को नचाना खेल नहीं' धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के गाय चराने और पर्वत उठाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे वाले भगवान तो गाय चराते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि गाय तो कोई भी चरा सकता है। उन्होंने गाते हुए कहा- गायों को चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का जिक्र करते हुए कहा-
तुम कहोगे कि हमारे वाले तो पर्वत उठा लेते हैं, ये कोई बड़ी बात है क्या? हमारे वाले भगवान के चेला ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। यहां उनका इशारा भगवान राम के भक्त हनुमान की ओर था। अपने बयान के आखिर में धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण का विरोधी होने की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा- इसका मतलब ये नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं। …………………….. यह खबर भी पढ़ें धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ का नाम ‘खसम पूजन-दिवस’ बताया बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताया था। शास्त्री शिवपुरी के करैरा में सात दिवसीय श्रीराम कथा कर रहे थे। वहीं, ‘सीधी बात’ सेशन के दौरान एक अनुयायी ने करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर सवाल पूछा था। इस पर शास्त्री ने जवाब दिया था। उन्होंने कहा था- पत्नियां एक दिन व्रत रखती हैं, फिर 364 दिन पतियों को ताने मारती हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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