धीरेंद्र शास्त्री ने टीआरपी के लिए दिया श्रीाराम-कृष्ण पर बयान:राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य बोले- कथावाचक और साधु-संत बयान देते समय सावधानी बरतें

Nov 04, 2026 - 18:54
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धीरेंद्र शास्त्री ने टीआरपी के लिए दिया श्रीाराम-कृष्ण पर बयान:राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य बोले- कथावाचक और साधु-संत बयान देते समय सावधानी बरतें
गोंडा। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत राजकुमार दास ने बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री के भगवान राम और कृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया है। बुधवार शाम करीब 6 बजे वह जिला मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम से लौटते समय आवास विकास के पास मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कथावाचकों को भगवान राम और कृष्ण के बारे में बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए। केवल टीआरपी बढ़ाने के लिए अनावश्यक बयान नहीं देना चाहिए। राम और कृष्ण के आदर्शों पर चलना चाहिए महंत राजकुमार दास ने कहा कि हमारे यहां मान्यता है कि राम और कृष्ण जगत में भगवान के दो प्रमुख रूप हैं। भगवान के 24 अवतार हुए हैं। भगवान कृष्ण ने जो कहा, उसे करना चाहिए और भगवान राम ने जो किया, उसे आदर्श मानकर जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी हमारे टेढ़े जरूर हैं, लेकिन उन्होंने जो किया है, वह कोई और नहीं कर सकता। भगवान राम और कृष्ण को देश-दुनिया में मानने वाले करोड़ों भक्त हैं। सनातन धर्म का विस्तार बहुत व्यापक है। ऐसे में भगवान के बारे में किसी तरह का बयान देकर टीआरपी बढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कथावाचकों और साधु-संतों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिन लोगों का अध्ययन कम है, उन्हें अपने ज्ञान को ठीक करना चाहिए। राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी महंत राजकुमार दास ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का होना जरूरी है। विपक्ष नहीं होगा तो सत्ता पक्ष निरंकुश हो जाएगा। हालांकि, विरोध सोच-समझकर और उचित तरीके से होना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों विरोध के जरिए अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं। फिलहाल यह संभव होता नहीं दिख रहा है। इसके लिए उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा। बदलाव के नारे पर कही ये बात पांच साल में बदलाव जरूरी के नारे पर महंत ने कहा कि बदलाव के पीछे कुछ कारण होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन, साधु-संतों और खासकर पौराणिक व ऐतिहासिक स्थलों और धर्मस्थलों की जो स्थिति आज बनी है, उसे देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि महाराजा विक्रमादित्य के बाद कोई ऐसा शासक हुआ हो, जिसने राजसत्ता में रहते हुए देश और धर्म की इतनी चिंता की हो।

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