लखनऊ के नवयुग कन्या कॉलेज में दीपावली मेले का आयोजन:छात्राओं ने लगाए स्वदेशी सामान के स्टॉल, भारतीय संस्कृति की दिखीं झलक

Nov 04, 2026 - 20:01
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लखनऊ के नवयुग कन्या कॉलेज में दीपावली मेले का आयोजन:छात्राओं ने लगाए स्वदेशी सामान के स्टॉल, भारतीय संस्कृति की दिखीं झलक
लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में दीपावली के अवसर पर रंग दे बसंती संस्था और अहिल्याबाई होलकर सांस्कृतिक समिति ने दीपावली मेले का आयोजन किया। इसमें छात्राओं की रचनात्मकता, भारतीय संस्कृति और स्वदेशी परंपराओं की झलक देखने को मिली। मेले का उद्घाटन उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने किया। इस दौरान संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, संयोगिता सिंह चौहान और महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय मौजूद रहीं। अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मिट्टी के दीपक और हस्तनिर्मित तोरण बने आकर्षण मेले में छात्राओं ने खानपान, घरेलू व्यंजनों, मिट्टी के दीपक, हस्तनिर्मित तोरण और रंगोली के स्टॉल लगाए। स्वदेशी और ईको-फ्रेंडली दीपावली का संदेश देते इन स्टॉलों पर लोगों ने खरीदारी की। दिव्यांग बच्चों की ओर से संचालित आशा ज्योति और पायसम के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। मुबारकपुर की साड़ियों के स्टॉल पर भी लोगों ने रुचि दिखाई। ओपन माइक में युवाओं ने दिखाई प्रतिभा रंग दे बसंती संस्था की ओर से ओपन माइक सत्र आयोजित किया गया। इसमें गायन, अभिव्यक्ति और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए युवाओं ने अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं। उन्होंने भजन प्रस्तुत किया। संयोगिता सिंह चौहान ने कहा कि दीपोत्सव केवल बाहरी प्रकाश का पर्व नहीं, बल्कि आंतरिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार भी करता है। बेटियां हर क्षेत्र में बना रही पहचान मुख्य अतिथि अपर्णा यादव ने कहा कि बेटियां अपनी प्रतिभा और क्षमता के बल पर हर क्षेत्र में पहचान बना रही हैं। ऐसे आयोजन उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि दीपावली भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन छात्राओं में संस्कारों और परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करते हैं।

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