चुनाव के दौरान मेट्रो में नहीं होंगे राजनीतिक विज्ञापन

दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव के दौरान दिल्ली मेट्रो में राजनीतिक विज्ञापनों पर लगी रोक को बरकरार रखा है। अदालत ने चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मेट्रो जैसी सरकारी व्यवस्था से जुड़े स्थानों पर राजनीतिक प्रचार की अनुमति नहीं दी जा सकती।

चुनाव के दौरान मेट्रो में नहीं होंगे राजनीतिक विज्ञापन

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जून 2026

हाई कोर्ट ने बरकरार रखी चुनाव आयोग की रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव के दौरान दिल्ली मेट्रो परिसरों में राजनीतिक विज्ञापनों पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग के फैसले को पूरी तरह उचित ठहराते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।इस फैसले के साथ ही चुनावी अवधि के दौरान दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और उससे जुड़ी संपत्तियों पर किसी भी राजनीतिक दल या नेता के प्रचार संबंधी विज्ञापन नहीं दिखाई देंगे।

विज्ञापन एजेंसियों को लगा झटका

मामले में कुछ विज्ञापन एजेंसियों ने चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एजेंसियों का तर्क था कि राजनीतिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे उनके व्यावसायिक हित प्रभावित हो रहे हैं।हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि चुनाव की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित किसी भी निजी व्यावसायिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

मेट्रो को बताया सरकारी व्यवस्था का हिस्सा

सुनवाई के दौरान विज्ञापन एजेंसियों ने सवाल उठाया कि यदि बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक विज्ञापन लगाए जा सकते हैं तो मेट्रो में क्यों नहीं।इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली मेट्रो एक सरकारी व्यवस्था से सीधे जुड़ी सार्वजनिक सेवा है और इसे अन्य सार्वजनिक स्थलों के समान नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार मेट्रो की प्रकृति और उसकी भूमिका को देखते हुए वहां राजनीतिक प्रचार की अनुमति देना उचित नहीं होगा।

डीएमआरसी ने भी रखा पक्ष

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अदालत में कहा कि एक सरकारी इकाई होने के नाते वह चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है। डीएमआरसी ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है।

चुनाव आयोग ने किया फैसले का बचाव

चुनाव आयोग ने अदालत में अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर प्रदान करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने बताया कि यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी किए गए थे।आयोग का कहना था कि सरकारी व्यवस्था से जुड़े मंचों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग किसी एक दल को अनुचित फायदा पहुंचा सकता है, इसलिए इस प्रकार की रोक जरूरी है।

निष्पक्ष चुनाव को दी प्राथमिकता

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि चुनाव आयोग का कदम कानून के अनुरूप है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अदालत ने माना कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे प्रतिबंध आवश्यक हो सकते हैं।फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि चुनावी अवधि के दौरान दिल्ली मेट्रो परिसर राजनीतिक प्रचार से मुक्त रहेगा और सभी दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की कोशिश जारी रहेगी।