घर वापसी के बाद आकाश आनंद के तेवर बदले:राहुल को पहले ‘अंकल’ अब बताया ‘कन्फ्यूज नेता’; 3 सभाएं वेस्ट यूपी में ही क्यों
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के तेवर बुलंदशहर में 28 अगस्त को बदले नजर आए। आकाश ने भाजपा, अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर तीखे हमले बोले। उन्होंने साफ कर दिया कि वह किसी भी राजनीतिक दल को निशाने पर लेने से परहेज नहीं करेंगे। सादाबाद (हाथरस) में अखिलेश और राहुल को ‘अंकल’ कहने वाले आकाश ने इस बार राहुल गांधी को ‘कन्फ्यूज नेता’ बताया। घर वापसी के बाद आकाश आनंद के इन तेवरों से 2 संकेत मिलते हैं। पहला- बसपा अगले विधानसभा चुनाव में खुद को केवल भाजपा-विरोधी के तौर पर नहीं रहना चाहती है। दूसरा- सपा-कांग्रेस से अलग खुद को राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करना चाहती है। आकाश ने तीनों जनसभाएं वेस्ट यूपी में की हैं। वो अच्छी तरह से जानते हैं कि बसपा का जाटव वोटर फिर एकजुट हुआ, तो उसकी खोई ताकत वापस लौटा सकता है। यूपी में 21% दलितों में 12% सिर्फ जाटव वोटर हैं। वेस्ट यूपी की कई सीटों पर ये 25 से 30% तक हैं। आकाश के भाषण में तीन राजनीतिक संदेश साफ नजर आए- आकाश ने कार्यकर्ताओं की गलतफहमी दूर की आकाश ने बहुजन आंदोलन के लिए त्याग का संकल्प लिया। कहा- जब तक बहुजन समाज को सत्ता में भागीदारी नहीं मिलती, वह चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने पार्टी से निष्कासन के बाद बहन मायावती से इसका कारण पूछने का जिक्र भी किया। आकाश के मुताबिक, उन्होंने मायावती को भरोसा दिलाया कि वह बहुजन मिशन के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करने को तैयार हैं। वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम के मुताबिक, इस बयान से आकाश ने कार्यकर्ताओं की गलतफहमी दूर करने का प्रयास किया। आकाश को पार्टी से निकाले जाने पर इस बार कार्यकर्ताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। निष्कासन के कारण का जिक्र करके आकाश ने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की कि इसे उनके धैर्य और संयम की परीक्षा के तौर पर देखा जाना चाहिए। सादाबाद में राहुल को ‘अंकल’, बुलंदशहर में ‘कन्फ्यूज नेता’ क्यों बताया 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में आकाश आनंद ने मिशन-2027 के लिए बसपा के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। उस दिन उन्होंने करीब 57 मिनट का भाषण दिया था। सादाबाद में उनकी रणनीति 2 स्तरों पर दिखाई दी। पहला- भाजपा सरकार के खिलाफ युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाना। दूसरा- अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर पीढ़ीगत अंतर को राजनीतिक संदेश में बदलना। इसके जरिए आकाश खुद को केवल मायावती के परिवार से जुड़े युवा नेता के रूप में नहीं, नई पीढ़ी की आवाज के तौर पर स्थापित करने की कोशिश करते दिखे। बुलंदशहर में आकाश ने एक कदम आगे बढ़कर कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी हमला बोला। आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अब जनता के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रही है। उन्होंने राहुल गांधी को ‘कन्फ्यूज नेता’ बताया। उन पर आरक्षण और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के संविधान की किताब लेकर चलने पर भी तंज कसा। आकाश ने कहा कि संविधान और आरक्षण की बात करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों के समर्थन में जमीन पर भी उतरना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार रतनलाल मणि के मुताबिक, आकाश जानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में दलित मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ गया था। 2027 में बसपा के सामने अपने कोर वोटरों को फिर से अपने साथ जोड़ने की चुनौती है। ऐसे में अखिलेश और राहुल पर एक साथ हमला बोलकर आकाश ने एनडीए और विपक्षी गठबंधन, दोनों से अलग बसपा के राजनीतिक एजेंडे को धार देने की कोशिश की है। बुलंदशहर में सबसे ज्यादा निशाने पर रही भाजपा सरकार 28 अक्टूबर को बुलंदशहर की सभा में आकाश आनंद ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। करीब 40 मिनट के भाषण में उन्होंने 20 मिनट भाजपा पर केंद्रित रखे। शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के मुद्दों को सरकार के विज्ञापन खर्च से जोड़ा। आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में अपनी छवि चमकाने के लिए सरकार ने विज्ञापनों पर करीब 7 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन, सरकारी पद भरने के लिए पैसे नहीं होने का बहाना किया जाता है। आकाश ने युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए उत्तर प्रदेश में 13 लाख सरकारी पद खाली होने का दावा किया। शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की स्थिति, पेपर लीक, महिलाओं की सुरक्षा और अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। झांसी के अस्पताल में आग लगने से बच्चों की मौत का मामला भी उठाया। बुलंदशहर के भाषण में आकाश ने एक्सप्रेस-वे और सड़कों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं का जिक्र किया, जिनके उद्घाटन के बाद ही सड़कों पर गड्ढे दिखाई देने लगे थे। इसके मुकाबले उन्होंने मायावती सरकार के दौरान बने आगरा-नोएडा एक्सप्रेस-वे का उदाहरण दिया। इसके जरिए संदेश देने की कोशिश की कि विकास का आकलन विज्ञापनों और उद्घाटन से नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और परियोजनाओं के लंबे समय तक टिकाऊ रहने से होना चाहिए। सपा के PDA पर हमले के क्या मायने हैं? बुलंदशहर के भाषण में एक अहम बदलाव यह रहा कि आकाश ने सपा को केवल भाजपा के मुकाबले विपक्षी दल के रूप में नहीं, बल्कि दलित वोटबैंक के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर दिखाया। उन्होंने अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) नारे पर सवाल उठाया। आरोप लगाया कि सपा अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने के लिए अपने राजनीतिक संदेश का इस्तेमाल करती है। आकाश ने जयंत चौधरी पर किए गए ‘चवन्नी’ वाले तंज का जिक्र किया। चौधरी चरण सिंह और मुलायम सिंह यादव का संदर्भ देते हुए सपा की सामाजिक न्याय की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने सपा सरकार के दौरान जिलों के नाम बदले जाने का मुद्दा भी उठाया। उनके तर्क का केंद्र यह था कि जो पार्टी दलितों, पिछड़ों और अन्य समुदायों के सम्मान की बात करती है, उसके पुराने फैसलों और राजनीतिक आचरण को भी परखा जाना चाहिए। इस तरह आकाश ने PDA के जरिए सपा की ओर आकर्षित हुए सामाजिक समूहों के बीच बसपा की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की। मायावती सरकार की उपलब्धियां गिनाकर बसपा को सत्ता का दावेदार बताया 25 अगस्त को गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में हुई रैली भी बसपा की रणनीति के लिहाज से अहम थी। दादरी में सपा और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के बाद बसपा ने जेवर के दनकौर में कार्यकर्ता सम्मेलन किया था। यहां आकाश आनंद ने जेवर विधानसभा सीट से सतवीर गुर्जर के नाम की घोषणा की थी। आकाश का भाषण इस क्षेत्र में संगठन और जनसमर्थन को दोबारा मजबूत करने पर केंद्रित था। गुर्जर समाज से आने वाले प्रत्याशी के नाम का ऐलान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया था। वहीं, बुलंदशहर में आकाश ने अपने करीब 40 मिनट के भाषण में लगभग 15 मिनट मायावती की 4 बार की सरकार के दौरान किए गए कामों को गिनाने में लगाए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले शिक्षा योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसके तहत 7 लाख से ज्यादा बच्चियों को शिक्षा का लाभ दिया गया। इस पर 600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। उन्होंने इंजीनियरिंग, होम्योपैथिक, पॉलिटेक्निक और पैरामेडिकल संस्थानों के साथ विश्वविद्यालयों, आईटीआई, स्कूलों और कॉलेजों के निर्माण का भी जिक्र किया। आकाश ने अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के लिए चलाई गई योजनाओं, आंबेडकर गांवों, भूमिहीन परिवारों को जमीन के पट्टे देने, शिक्षक भर्ती, सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, पुलिस भर्ती और सरकारी रोजगार से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि बसपा शासन के दौरान शिक्षा, सामाजिक सम्मान और रोजगार के क्षेत्र में काम हुआ था। वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम के मुताबिक, मायावती सरकार की उपलब्धियां गिनाकर आकाश आनंद बसपा शासन की तुलना सपा-भाजपा सरकारों के कामकाज से कराना चाहते हैं। इसके जरिए वह बसपा को एक बार फिर सत्ता के मजबूत दावेदार के रूप में पेश करने और कार्यकर्ताओं में भरोसा जगाने की कोशिश कर रहे हैं। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें - आकाश आनंद फिर सियासी मैदान में उतरे, बुलंदशहर में रैली की, कहा- मायावती से पूछा था, मुझे बार-बार पार्टी से क्यों निकालती हैं बसपा में चौथी बार वापसी करने के बाद मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने पहली बार बुलंदशहर में जनसभा की। जनसभा बुधवार दोपहर 1:45 बजे अनूपशहर के खालोर में हुई। मंच पर आकाश आनंद को ब्लॉक प्रमुख मनोज प्रधान ने सोने का मुकुट पहनाया। पढ़िए पूरी खबर…
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