गुजरात की मिट्टी से गढ़ रहे लक्ष्मी-गणेश:कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत में इजाफा, खर्च के बाद बचता है 20% मुनाफा

Nov 03, 2026 - 13:56
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गुजरात की मिट्टी से गढ़ रहे लक्ष्मी-गणेश:कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत में इजाफा, खर्च के बाद बचता है 20% मुनाफा
मैनपुरी में दीपावली पर घर-घर में लक्ष्मी-गणेश की पूजा होगी, लेकिन इन प्रतिमाओं को तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों के सामने इस बार महंगाई ने चुनौती खड़ी कर दी है। मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी और दूसरे कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ गई है, जबकि बाजार में ग्राहकी पहले जैसी नहीं है। इसका असर कारीगरों के कारोबार और मुनाफे पर पड़ रहा है। शहर की प्रजापति कॉलोनी में इन दिनों मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कहीं मूर्तियों को आकार दिया जा रहा है तो कहीं उन पर रंग भरकर सजाया जा रहा है। पहले के मुकाबले 70 फीसदी ही मांग पिछले 15 साल से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे प्रमोद कुमार बताते हैं कि इस बार बाजार की स्थिति कमजोर है। पहले के मुकाबले करीब 70 फीसदी ही ग्राहकी मिल रही है। कच्चे माल की महंगाई के चलते दुकानदार भी जरूरत के हिसाब से ही मूर्तियां खरीद रहे हैं। प्रमोद के मुताबिक, वह सालभर मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। इस काम में जल्दबाजी के बजाय बारीकी और धैर्य के साथ प्रतिमाएं तैयार करनी पड़ती हैं। परिवार के साथ 7-8 कारीगर तैयार करते हैं मूर्तियां प्रमोद बताते हैं कि वह एक साल में छोटे-बड़े आकार की करीब 4 हजार मूर्तियां तैयार करते हैं। इस काम में परिवार के सदस्यों के साथ 7-8 कारीगर लगे हुए हैं। इनमें परिवार के लोग और रोजगार की तलाश में आए दूसरे युवक भी शामिल हैं। इस तरह दीपावली के लिए तैयार होने वाली मूर्तियां स्थानीय स्तर पर कई लोगों के रोजगार का जरिया भी बनी हुई हैं। मूर्तियों की कीमत 20 रुपए से शुरू होकर 550 रुपए तक है। कीमत आकार और डिजाइन के हिसाब से तय होती है। प्रमोद के अनुसार, मूर्तियां तैयार करने में करीब 80 फीसदी लागत लग जाती है, जबकि लगभग 20 फीसदी ही मुनाफा बचता है। मांग कमजोर होने पर उन्हें मुनाफा भी कम रखना पड़ता है। बड़े शहरों से आने वाली मूर्तियों के कारण प्रतिस्पर्धा भी बनी रहती है। गुजरात से मंगानी पड़ती है मिट्टी प्रमोद बताते हैं कि ग्राहक कलकत्ता की मिट्टी से बनी मूर्तियों की मांग अधिक करते हैं, जबकि स्थानीय कारीगर उत्तर प्रदेश की पारंपरिक शैली में प्रतिमाएं तैयार करते हैं। कारोबार की एक खास बात यह भी है कि मैनपुरी के कारीगरों को मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी दूसरे राज्यों से मंगानी पड़ती है। प्रमोद के मुताबिक, यूपी की मूर्तियां तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी गुजरात से आती है। ऐसे में मिट्टी की उपलब्धता और उसकी कीमत भी कारोबार को प्रभावित करती है। दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए बाजार में कई तरह की मूर्तियां उपलब्ध हैं, लेकिन स्थानीय कारीगरों के लिए चुनौती बढ़ती लागत और कमजोर ग्राहकी के बीच अपने पारंपरिक काम को बचाए रखने की है।

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