जौनपुर में श्रीराम के वनगमन का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावुक:आचार्य शांतनु महाराज ने राम के त्याग और सीता के समर्पण का किया वर्णन
जौनपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 9 दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन हो रहा है। इसके छठवें दिन सोमवार को 3 बजे से 7 बजे तक आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन का प्रसंग सुनाया। यह कथा बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में चल रही है। कथा के दौरान आचार्य ने श्रीराम के त्याग, माता सीता के समर्पण और लक्ष्मण जी की भाई के प्रति भक्ति का वर्णन किया। इसे सुनकर कई श्रोता भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं। आचार्य शांतनु महाराज ने श्रीराम-सीता के विवाह के बाद अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक की तैयारियों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि दासी मंथरा की बातों में आकर महारानी कैकेयी ने भरत के लिए राजसिंहासन और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। महाराज दशरथ के लिए श्रीराम को वनवास भेजना सहन करना मुश्किल था, लेकिन वचन की मर्यादा के लिए उन्हें विवश होना पड़ा। भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए बिना विरोध वनवास स्वीकार किया। उनके लिए धर्म, सत्य और मर्यादा राजसिंहासन से बढ़कर थी। माता सीता और लक्ष्मण जी ने भी उनके साथ वन जाने का निर्णय लिया। प्रजा अपने प्रिय राजकुमार को रोकना चाहती थी, लेकिन भगवान श्रीराम अपने कर्तव्य और पिता के वचन के पालन के लिए दृढ़ रहे। महाराज दशरथ के पुत्र-वियोग और श्रीराम के त्याग का वर्णन सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक ने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें कर्तव्यपालन, त्याग, आज्ञाकारिता और मर्यादा का संदेश देता है। माता सीता का समर्पण और लक्ष्मण जी की भ्रातृभक्ति भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। कथा में दूर-दराज से पहुंचे अनेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।
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