कानपुर नगर निगम में दो फाड़:महापौर के साथ 30 से ज्यादा पार्षद, नगर आयुक्त को मिला कर्मचारियों का साथ, आंदोलन की चेतावनी दी
कानपुर नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच अधिकारों की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। इस खींचतान में कर्मचारी भी कूद पड़े हैं। संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले नगर निगम के कर्मचारी संगठनों ने शक्ति प्रदर्शन कर नगर आयुक्त के खिलाफ कार्यकारिणी की बैठक में निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी का विरोध किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अधिकारियों और कर्मचारियों के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसी स्थिति दोबारा बनी तो आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों ने नगर आयुक्त जिंदाबाद और अधिकारियों का अपमान नहीं सहेंगे जैसे नारे भी लगाए। नगर निगम में अब दो फाड़ नगर निगम में अब दो खेमे बनते नजर आ रहे हैं। एक ओर महापौर के समर्थन में कार्यकारिणी के सदस्यों समेत 30 से अधिक पार्षद खड़े हैं, वहीं दूसरी ओर नगर आयुक्त के समर्थन में कर्मचारी उतर आए हैं। कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष और महामंत्रियों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद नगर निगम मुख्यालय में शक्ति प्रदर्शन किया और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर निंदा प्रस्ताव की तैयारी पर विरोध जताया। नगर आयुक्त के समर्थन में उतरे कर्मचारी बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी शहर की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई उचित नहीं है। नगर निगम में अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए। कर्मचारियों ने विकास और जनहित के कार्यों में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया, लेकिन सम्मान से जुड़े मामले में समझौता नहीं करने की बात भी कही। इस दौरान कर्मचारी संघ के महामंत्री रमाकांत मिश्रा, हरिओम वाल्मीकि, कमरुद्दीन समेत अन्य कर्मचारी नेता मौजूद रहे। मंगल भवन और कन्वेंशन सेंटर बना मुद्दा महापौर और नगर आयुक्त के बीच विवाद की वजह कन्वेंशन सेंटर के टेंडर, मंगल भवन की समितियां भंग करने और पार्षदों को हॉट मिक्स प्लांट की समितियों से हटाने जैसे मुद्दे हैं। महापौर इन मामलों में नगर आयुक्त से जवाब मांग रही हैं, जबकि नगर आयुक्त लगातार एजेंडे पर चर्चा का हवाला देकर जवाब नहीं दे रहे हैं। 28 अक्टूबर को चौथी बार हुई कार्यकारिणी की बैठक में 12 सदस्यों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी। बैठक में महापौर दो अधिवक्ताओं के साथ पहुंचीं तो नगर आयुक्त ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के सामने जवाब नहीं देंगे। इसके बाद वह अपने अधिकारियों के साथ बैठक छोड़कर चले गए। महज 15 मिनट में बैठक समाप्त हो गई। इसके बाद पार्षदों ने विरोध-प्रदर्शन कर मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाने का ऐलान किया था। अब कर्मचारी संगठनों के खुलकर सामने आने से नगर निगम का विवाद और गहरा गया है।
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