कंबोडिया के साइबर ठगों से प्रयागराज का कनेक्शन:नौकरी का झांसा देकर साइबर स्लेवरी में धकेलने वाले नेटवर्क की जांच में खुलासा

Nov 08, 2026 - 13:04
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कंबोडिया के साइबर ठगों से प्रयागराज का कनेक्शन:नौकरी का झांसा देकर साइबर स्लेवरी में धकेलने वाले नेटवर्क की जांच में खुलासा
प्रयागराज में बैठकर कंबोडिया में सक्रिय साइबर ठगों के साथ संपर्क रखने और देशभर में साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों का आदान-प्रदान करने का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम सेल की जांच में करेली के एक युवक का नाम सामने आया है। जांच में उसके क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में करीब 18 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा उसके पासपोर्ट की पड़ताल में वर्ष 2022 से 2025 के बीच लगातार चार साल कंबोडिया जाने का रिकॉर्ड मिला है। आरोप है कि युवक कंबोडिया के विदेशी मोबाइल नंबरों के संपर्क में रहकर भारतीय बैंकों के खातों की जानकारी साझा कर रहा था। इन खातों के संबंध में देशभर में दर्जनों साइबर अपराध की शिकायतें मिली हैं। मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। I4C से मिले इनपुट के आधार पर यह जांच करेली के जीटीबी नगर निवासी फरहान अहमद पुत्र मेराज अहमद के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। साइबर सेल के उपनिरीक्षक रुपेश कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मुख्यालय साइबर क्राइम, उत्तर प्रदेश को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिले इनपुट के आधार पर यह जांच की गई थी। दरअसल, गृह मंत्रालय को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में संचालित साइबर स्कैम सेंटरों में भारतीय नागरिकों को नौकरी का झांसा देकर भर्ती कराने वाले संदिग्ध एजेंटों के बारे में जानकारी मिली थी। कंबोडिया, लाओस, मलेशिया और वियतनाम स्थित इन सेंटरों से वापस आए भारतीय नागरिकों से पूछताछ के आधार पर एजेंटों की सूची तैयार की गई थी। आरोप है कि ये एजेंट सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापन देकर भारतीय युवाओं को विदेश भेजते हैं। वहां पहुंचने के बाद उन्हें साइबर ठगी के काम में लगा दिया जाता है। इस तरह की गतिविधियों को साइबर स्लेवरी कहा जाता है। इसी नेटवर्क में शामिल संदिग्ध एजेंटों के सत्यापन और कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद प्रयागराज में भी जांच शुरू की गई। विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप पर लगातार संपर्क जांच के दौरान फरहान अहमद के ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई गई। डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल में उसके तीन संदिग्ध विदेशी मोबाइल नंबरों के संपर्क में रहने की बात सामने आई। इनमें दो नंबर कंबोडिया के कंट्री कोड (+855) वाले हैं। तहरीर के मुताबिक, इन नंबरों के जरिए व्हाट्सएप पर भारतीय बैंकों के खातों की जानकारी का आदान-प्रदान किया जा रहा था। एक विदेशी नंबर के माध्यम से पांच बैंक खातों की जानकारी साझा की गई, जबकि दूसरे नंबर के जरिए आठ खातों का आदान-प्रदान हुआ। साइबर सेल ने इन खातों को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर चेक किया तो देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज दर्जनों साइबर अपराध की शिकायतें मिलीं। इससे इन खातों के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने का संदेह गहरा गया है। पुलिस अब इन खातों से जुड़े लेनदेन और उनके वास्तविक संचालकों की भूमिका की जांच कर रही है। क्रिप्टो वॉलेट में करीब 18 लाख की रकम मिली डिजिटल साक्ष्य जुटाने के दौरान फरहान के क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की भी पड़ताल की गई। इसके लिए ब्लॉकचेन और क्रिप्टो एनालिसिस टूल्स की मदद ली गई। तहरीर में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, उसके वॉलेट में 19,365.352 यूनिट क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 18 लाख रुपये बताई गई है। जांच में दो अन्य संदिग्ध क्रिप्टो वॉलेट से इस वॉलेट में भुगतान आने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से साइबर अपराध से जुड़ी रकम का लेनदेन किया जा रहा था। हालांकि, इस रकम का वास्तविक स्रोत क्या है और इसका साइबर ठगी से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि विवेचना में होगी। चार साल लगातार कंबोडिया की यात्रा का रिकॉर्ड साइबर सेल ने फरहान के पासपोर्ट की भी जांच की। इसमें वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में उसके कंबोडिया जाने का रिकॉर्ड मिला। यानी लगातार चार वर्षों तक उसने कंबोडिया की यात्रा की। जांच में कंबोडिया से संचालित एक सोशल मीडिया अकाउंट और विदेशी मोबाइल नंबर के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। तहरीर के मुताबिक, इसी संपर्क के जरिए भारत के अलग-अलग बैंकों के खातों की जानकारी साझा की जा रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फरहान की कंबोडिया यात्राओं का वहां संचालित साइबर स्कैम सेंटरों से क्या संबंध है और विदेशी नंबरों के पीछे कौन लोग हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि भारतीय बैंक खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया और इस नेटवर्क में प्रयागराज के अलावा किन-किन शहरों के लोग शामिल हैं। विदेशी नेटवर्क की भूमिका खंगाल रही पुलिस साइबर सेल के उपनिरीक्षक रुपेश कुमार की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर के साथ पुलिस मुख्यालय से मिली रिपोर्ट, क्रिप्टोकरेंसी एनालिसिस रिपोर्ट और NCRP पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों का ब्योरा भी संलग्न किया गया है। साइबर थाना प्रभारी राघवेंद्र सिंह ने बताया, पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर फरहान के विदेशी संपर्कों, बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि दक्षिण-पूर्व एशिया में नौकरी का झांसा देकर भारतीय युवाओं को भेजने वाले एजेंटों के नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी।

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