लखनऊ में SIR को लेकर नागरिक बैठक:ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा कि मांग किया, योगेंद्र यादव बोले-1 नवंबर को दिल्ली में होगी ऐतिहासिक रैली

Oct 26, 2026 - 22:24
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लखनऊ में SIR को लेकर नागरिक बैठक:ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा कि मांग किया, योगेंद्र यादव बोले-1 नवंबर को दिल्ली में होगी ऐतिहासिक रैली
लखनऊ में उत्तर प्रदेश मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सोमवार को कैफी आजमी अकादमी में नागरिक बैठक हुई। इसमें SIR प्रक्रिया को रद्द करने और मतदाता सूची में हुए संशोधनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने और सत्यापन में सामने आई विसंगतियों से पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। बैठक की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूप रेखा वर्मा ने की, जबकि संचालन डॉ. अलीमुल्लाह खान ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में विजय महाजन, योगेंद्र यादव और नदीम खान ने विचार रखे।योगेंद्र यादव ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोकतंत्र बचाने के लिए आंदोलन चल रहे हैं। इनकी मुख्य मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग किया। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग उठाई।योगेंद्र यादव ने कहा कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ आंदोलन जारी है और अब यह दूसरे चरण में पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली इस लड़ाई को नई दिशा देगी। इसमें I.N.D.I.A. गठबंधन के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के शामिल होने की बात कही। ‘प्रवासी मजदूरों के अधिकारों पर चिंता’ बैठक में वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश की प्रारूप मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम बाहर होने के आंकड़े पर चिंता जताई । उन्होंने कहा कि पुराने रिकॉर्ड से विवरण का मिलान नहीं होना या दस्तावेजों की कमी किसी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बननी चाहिए। वक्ताओं ने, प्रवासी मजदूरों, महिलाओं और बुजुर्गों के मताधिकार की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में रखीं प्रमुख मांगें बैठक में उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया रद्द करने, मतदाता सूची में हुए संशोधनों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने और पीलीभीत व आजमगढ़ के मामलों की जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की गई। इसके अलावा गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने, संशोधन प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने साथ ही प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।

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