अलीगंज अग्निकांड: आज आएगा बड़ा फैसला!

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड से जुड़ी इमारत में कथित अवैध निर्माण के मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण की सक्षम प्राधिकारी अदालत ने सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया है। आज आने वाले फैसले से तय होगा कि भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी या शमन मानचित्र के माध्यम से नियमितीकरण का अवसर मिलेगा। यह मामला 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के बाद चर्चा में आया था, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी।

अलीगंज अग्निकांड: आज आएगा बड़ा फैसला!

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 10 जुलाई 2026

लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अवैध निर्माण को लेकर चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की सक्षम प्राधिकारी अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है और आज निर्णय आने की संभावना है। अदालत के फैसले से यह तय होगा कि भवन को ध्वस्त किया जाएगा या भवन निर्माण नियमों के तहत नियमित करने का अवसर दिया जाएगा।


अलीगंज अग्निकांड के बाद अब अदालत के फैसले का इंतजार

राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिस भवन को लेकर अवैध निर्माण के आरोप लगे थे, उस मामले में अब महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की सक्षम प्राधिकारी अदालत में लगातार तीन दिनों तक चली सुनवाई पूरी हो चुकी है। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब शुक्रवार को आने वाले निर्णय पर न केवल संबंधित पक्षों बल्कि शहर के लोगों और प्रशासन की भी निगाहें टिकी हुई हैं।


तीन दिन तक चली गहन सुनवाई, सभी पक्षों को मिला पूरा अवसर

इस मामले में अदालत ने किसी भी पक्ष की बात सुने बिना जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया। लगातार तीन दिनों तक भवन स्वामी, उनके अधिवक्ता, लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और अभियंताओं की दलीलों को विस्तार से सुना गया। अदालत ने सभी दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शों, निर्माण संबंधी अभिलेखों और नोटिस से जुड़े तथ्यों का भी गहन अध्ययन किया। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया जाएगा।


भवन स्वामी ने अदालत में क्या रखा अपना पक्ष

भवन स्वामी की ओर से अदालत में कहा गया कि यदि भवन का कोई हिस्सा नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो उसे अपने खर्च पर स्वयं हटाने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने नई भवन निर्माण नीति के अंतर्गत शमन मानचित्र के माध्यम से शेष भवन को नियमित करने का अनुरोध भी किया। उनके अधिवक्ता ने यह भी दावा किया कि भवन का मूल स्वीकृत नक्शा पहले से मौजूद था, लेकिन भीषण आग लगने के दौरान वह पूरी तरह नष्ट हो गया। हालांकि अदालत द्वारा मांगे जाने पर उस नक्शे की कोई प्रमाणित प्रति प्रस्तुत नहीं की जा सकी।


लखनऊ विकास प्राधिकरण ने लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि संबंधित भवन के लिए केवल बेसमेंट और दो मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद भवन स्वामी ने बिना अनुमति तीसरी मंजिल का निर्माण करा लिया, जो पूरी तरह अवैध है। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि स्वीकृत सीमा से अधिक बेसमेंट बनाया गया तथा भवन निर्माण के दौरान आवश्यक खुला स्थान भी नहीं छोड़ा गया। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण में कई महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन किया गया, जिससे सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


नोटिस की वैधता को लेकर भी दोनों पक्षों में बहस

सुनवाई के दौरान भवन स्वामी के अधिवक्ता ने लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भवन का कौन-सा हिस्सा अवैध है और कितना हिस्सा हटाने के बाद निर्माण नियमों के अनुरूप माना जाएगा। उन्होंने अदालत से इस आधार पर राहत देने की मांग की। दूसरी ओर प्राधिकरण के अधिवक्ताओं ने कहा कि जारी किया गया नोटिस पूरी तरह नियमों के अनुरूप है और उसमें पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं।


आज का फैसला तय करेगा भवन का भविष्य

अदालत का आज आने वाला निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा। यदि अदालत लखनऊ विकास प्राधिकरण की दलीलों से सहमत होती है तो भवन के अवैध हिस्से पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं यदि भवन स्वामी की मांग स्वीकार होती है तो उन्हें शमन मानचित्र के माध्यम से निर्माण नियमित कराने का अवसर मिल सकता है। इस कारण यह फैसला केवल एक भवन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भविष्य में अवैध निर्माण से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।


22 जून की भीषण आग में गई थीं 15 लोगों की जान

गौरतलब है कि बीते 22 जून को अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद जांच में भवन निर्माण से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने आए थे। आरोप लगे कि भवन में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था और निर्माण स्वीकृत मानकों से अधिक किया गया था। इसके बाद प्रशासन और लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पूरे मामले की जांच शुरू की तथा अवैध निर्माण के संबंध में कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की।


फैसले पर प्रशासन और लोगों की नजर

यह मामला केवल एक भवन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे शहर में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ी बहस का विषय बन चुका है। प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं शहर के लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाला फैसला भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने और भवन निर्माण नियमों के सख्ती से पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। अब सभी की निगाहें अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई हैं।