नोएडा एलिवेटेड रोड पहले भी गुणवत्ता पर उठे सवाल:2020 में आई थी दरार, अब एक महीने में दो बार गढ्ढा, IIT ने पूरी की जांच, लिए पांच तरह के सैंपल
एमपी-टू एलिवेटेड रोड पर सड़क में गड्ढा होने के बाद इसकी मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर फिर सवाल उठने लगे हैं। इस रोड की मजबूती पर पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। 2020 में दरार आने से लेकर 2022 में गुणवत्ता पर सवाल उठने तक प्राधिकरण ने जांच कराई, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अब आईआईटी रुड़की ने सड़क की जांच पूरी कर पांच तरह के सैंपल लिए हैं। इनकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आने की उम्मीद है। इसके बाद प्राधिकरण सुधार कार्य कराएगा। एमपी-टू एलिवेटेड रोड का निर्माण नोएडा प्राधिकरण ने आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया लिमिटेड से कराया था। निर्माण 2013 में शुरू हुआ था। 29 जून 2017 को एलिवेटेड रोड का एक हिस्सा वाहनों के लिए खोला गया, जबकि दूसरा हिस्सा 2018 में शुरू हुआ। इसके करीब दो साल बाद ही सड़क की मजबूती पर सवाल उठने लगे थे। 2020 में आई थी दरार, कई महीने बंद रहा रैंप
2020 में सेक्टर-61 से सेक्टर-18 की ओर आते समय एलिवेटेड रोड पर दरार आ गई थी। इसके बाद सेक्टर-31 की ओर से चढ़ने वाले रैंप को वाहनों के लिए बंद करना पड़ा। कई महीने तक मरम्मत का काम चला। 2022 में भी लोगों ने एलिवेटेड रोड की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इसके बाद आईआईटी रुड़की से जांच कराई गई थी। एक महीने में दो बार सड़क क्षतिग्रस्त
पिछले महीने सेक्टर-28 की ओर उतरते समय एलिवेटेड रोड पर सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया था। इसके करीब एक महीने बाद अब सेक्टर-33 के सामने सड़क में गहरा गड्ढा हो गया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से सड़क की मजबूती और पहले कराए गए सुधार कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले लापरवाही के मामले में प्राधिकरण ने निर्माण कंपनी पर 35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। रखरखाव को लेकर कंपनी और प्राधिकरण में विवाद
निर्माण कंपनी को एलिवेटेड रोड शुरू होने के बाद पांच साल तक इसका रखरखाव करना था। हालांकि, लागत को लेकर कंपनी और प्राधिकरण के बीच विवाद हो गया। यह मामला व्यावसायिक कोर्ट में है। ऐसे में रखरखाव और जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। आईआईटी की रिपोर्ट के बाद होगा सुधार
एलिवेटेड रोड पर हाल में हुए गड्ढे की जांच आईआईटी रुड़की की टीम ने पूरी कर ली है। टीम ने पांच तरह के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों को एक-दो दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर गड्ढा होने की वजह पता लगाई जाएगी और उसके समाधान के लिए जरूरी सुधार कार्य कराए जाएंगे।
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