नोएडा PNB में करोड़ों का घोटाला:CBI गाजियाबाद एंटी करप्शन ब्रांच ने महिला कर्मचारी समेत 8 पर FIR दर्ज की
नोएडा जिले में पंजाब नेशनल बैंक में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में CBI गाजियाबाद एंटी करप्शन ब्रांच ने महिला कर्मचारी दीपांशी समेत 8 पर केस दर्ज किया गया है, जहां बैंक खातों में अनाधिकृत लेनदेन और एफडीआर में हेरफेर की गई है। जहां आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार के नाम भी शामिल हैं। बैंक की प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने यह केस दर्ज किया है। मामला सीबीआई के पास पहुंचते ही बैंक ऑफिसरों में हड़कंप मचा है। बैंक के चीफ मैनेजर ने कार्रवाई के लिए लिखा पीएनबी नोएडा सर्किल के चीफ मैनेजर अजय कुमार पांडे ने जांच के बाद सीबीआई गाजियाबाद एंटी करप्शन के लिए लिखा- पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा ग्रेटर नोएडा (161310) के सेक्टर-Pi में है, अपने अधिकृत प्रतिनिधि अजय कुमार पांडे मुख्य प्रबंधक के माध्यम से यह शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से पूरी तरह अवगत हैं। बैंक के रिकॉर्ड से पता चलता है कि शाखा की कर्मचारी दीपांशी और अन्य आरोपी आशुतोष कुमार पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी यह खाता धारक हैं। इन सभी ने अपराध किए हैं। इन सभी दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सके। ऐसे पकड़ में आया पूरा मामला पीएनबी के मैनेजर की तरफ से जांच के बाद बताया गया कि हमारी ग्रेटर नोएडा (161310) के सेक्टर-Pi स्थित शाखा में संगीता नाम की महिला का खाता है। वह अपने पति और बेटी के साथ अपनी पासबुक अपडेट कराने शाखा आईं। उन्होंने देखा कि 16 सितंबर 2026 को उनके खाते से तीन लेनदेन (ट्रांजैक्शन) हुए हैं, जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। जिसके बाद संगीता ने उन्होंने ब्रांच हेड से मिलना चाहा, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं थे। हालांकि बैंक की कर्मचारी दीपांशी तुरंत उनसे मिलीं और उन्हें यह विश्वास दिला दिया कि ये लेनदेन बिल्कुल सही हैं। पीड़ित पर ही आरोप लगा दिए संगीता के खाते में हुई गंभीर अनियमितताओं के बारे में उनके पति की शिकायत पीएनबी के मैनेजर के संज्ञान में लाई गई। जहां मैनेजर ने अपनी कर्मचारी दीपांशी से इस घटना के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि संगीता ने अपने पति से फोन पर बात की थी और उन्हें बताया था कि उन्होंने किसी प्रॉपर्टी में निवेश किया है, जिसके लिए उन्होंने विवादित लेनदेन की रकम आशुतोष पाठक के खाते में ट्रांसफर की है। ट्रांजेक्शन से जुड़े वाउचर भी गायब इसके बाद शिकायत और उसमें शामिल रकम को देखते हुए यह पाया गया कि उस विशेष तारीख के तीन विवादित लेन-देन यानी ट्रांजेक्शन से जुड़े वाउचर गायब हैं। जहां बैंक शाखा में कहीं नहीं मिल रहे हैं। इससे शाखा प्रमुख को संदेह हुआ। जब बैंक मैनेजर ने दीपांशी से और पूछताछ की, तो वह टूट गईं और उन्होंने स्वीकार किया कि ये लेन-देन खाताधारक आशुतोष पाठक के निर्देश पर किए गए। बैंक कर्मचारी दीपांशी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने यह धोखाधड़ी कैसे की। उन्होंने माना कि उन्होंने बैंक के अधिकारियों की जानकारी और सहमति के बिना उनके क्रेडेंशियल्स यानी लॉगिन विवरण का गलत इस्तेमाल किया और ग्राहकों के खातों से अनधिकृत डेबिट ट्रांजेक्शन किए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इन अनधिकृत डेबिट ट्रांजेक्शन से जुड़े वाउचर नष्ट कर दिए थे, क्योंकि इनके समर्थन में न तो ग्राहकों के कोई निर्देश थे और न ही शाखा अधिकारियों की कोई मंजूरी। दीपांशी ने ही खोला आशुतोष का बैंक अकाउंट दीपांशी के इस खुलासे के बाद बैंक मैनेजर आशुतोष पाठक के खाते की और जांच-पड़ताल की। इसमें पता चला कि आशुतोष पाठक का खाता दीपांशी ने ही खोला था। इसके अलावा, बैंक के कई ग्राहकों के खातों से आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति शालिनी और सरोज देवी के खातों में कई लेन-देन किए गए थे। इसका मतलब यह है कि ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति के पैसे निकाले गए और सीधे आशुतोष पाठक के खाते में डाल दिए गए, या फिर प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति, शालिनी और सरोज देवी के खातों के जरिए घुमा-फिराकर आशुतोष पाठक के खाते तक पहुंचा दिए गए। या किसी अन्य तरीके से निकाल लिए गए। यानी, सभी विवादित डेबिट ट्रांजेक्शन एक सोची-समझी साजिश के तहत आशुतोष पाठक के खाते में ही पहुंचे। इससे पता चलता है कि ग्राहकों के पैसों को अनधिकृत डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिए व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह भेजना डायवर्जन का एक पूरा पैटर्न अपनाया गया था। अभी तक की जांच में 10 करोड़ 24 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है।
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