10-20 के नोट बदलेंगे! आ रहे हैं प्लास्टिक नोट
भारतीय रिजर्व बैंक दस और बीस रुपये के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण कर रहा है। शुरुआती दौर में इनकी छपाई सामान्य नोटों से महंगी होगी, लेकिन अधिक टिकाऊ होने के कारण लंबे समय में इन्हें अधिक किफायती माना जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
भारतीय रिजर्व बैंक छोटे मूल्य वर्ग के नोटों को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत दस और बीस रुपये के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण किया जा रहा है। शुरुआती दौर में इन नोटों की छपाई सामान्य नोटों की तुलना में अधिक महंगी पड़ सकती है, लेकिन लंबे समय में इनके अधिक समय तक चलने के कारण इन्हें अधिक किफायती माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल रही तो आने वाले वर्षों में लोगों की जेब में कपास आधारित नोटों की जगह प्लास्टिक के नोट दिखाई दे सकते हैं।
दस और बीस रुपये के नोटों में हो सकता है बड़ा बदलाव
देश में आज भी बड़ी संख्या में लोग दैनिक लेन-देन के लिए नकदी का उपयोग करते हैं। यद्यपि डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है, फिर भी छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की आवश्यकता पहले की तरह बनी हुई है। इन्हीं नोटों का सबसे अधिक उपयोग होने के कारण ये जल्दी पुराने और खराब हो जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक अब अधिक टिकाऊ विकल्प पर काम कर रहा है।रिजर्व बैंक ने दस और बीस रुपये के प्लास्टिक नोटों के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में इन नोटों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। इससे बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी और मुद्रा की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
सामान्य दस और बीस रुपये के नोट छापने में कितना खर्च आता है
अधिकांश लोग यह मानते हैं कि भारतीय मुद्रा के नोट साधारण कागज से तैयार किए जाते हैं, जबकि वास्तव में इन्हें विशेष प्रकार के शत-प्रतिशत कपास आधारित पदार्थ से बनाया जाता है। यही कारण है कि सामान्य कागज की तुलना में ये अधिक मजबूत होते हैं, लेकिन लगातार उपयोग के कारण समय के साथ घिसने और फटने लगते हैं।सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध जानकारी के अनुसार दस रुपये का एक नोट छापने में लगभग सत्तर पैसे से एक रुपये एक पैसे तक का खर्च आता है। वहीं बीस रुपये का एक नोट तैयार करने में लगभग पचानवे पैसे से एक रुपये तक का व्यय होता है। यानी वर्तमान व्यवस्था में छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की छपाई अपेक्षाकृत कम लागत में हो जाती है।
प्लास्टिक नोटों की छपाई कितनी महंगी होगी
भारतीय रिजर्व बैंक की नोट मुद्रण कंपनी ने दस और बीस रुपये के प्लास्टिक नोटों के परीक्षण के लिए वैश्विक निविदा जारी की है। इन नोटों को कपास आधारित सामग्री के स्थान पर विशेष बहुलक परत पर तैयार किया जाएगा। यही नई तकनीक इनकी लागत बढ़ा देती है।विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती चरण में एक प्लास्टिक नोट तैयार करने पर लगभग दो रुपये से छह रुपये तक का खर्च आ सकता है। अर्थात एक प्लास्टिक नोट की छपाई सामान्य नोट की तुलना में कई गुना अधिक महंगी पड़ सकती है। हालांकि यह शुरुआती अनुमान है और बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद लागत में कमी भी आ सकती है।
महंगे होने के बावजूद क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक नोट
पहली नजर में प्लास्टिक नोटों की लागत अधिक दिखाई देती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में ये अधिक लाभदायक साबित हो सकते हैं। सामान्य नोट बार-बार मुड़ने, भीगने और अधिक उपयोग के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं। इसके कारण सरकार को लगातार नए नोट छापने पड़ते हैं, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है।इसके विपरीत प्लास्टिक नोट सामान्य नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक उपयोग किए जा सकते हैं। यदि किसी नोट की आयु अधिक होगी तो उसे बार-बार बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसी वजह से शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद लंबे समय में सरकार का कुल खर्च कम हो सकता है।
प्लास्टिक नोटों के क्या होंगे सबसे बड़े लाभ
प्लास्टिक नोट पानी, नमी, धूल और गंदगी से सामान्य नोटों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित रहते हैं। ये जल्दी फटते नहीं हैं और लगातार उपयोग के बाद भी लंबे समय तक अच्छी स्थिति में बने रहते हैं। इससे लोगों को साफ और टिकाऊ मुद्रा प्राप्त होगी।इसके अलावा ऐसे नोटों में आधुनिक सुरक्षा विशेषताएं जोड़ना भी अधिक आसान माना जाता है। इससे नकली नोटों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है। कई देशों में पहले से ही प्लास्टिक मुद्रा का उपयोग किया जा रहा है और वहां इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
सरकार और आम लोगों को क्या होगा लाभ
यदि प्लास्टिक नोट सफलतापूर्वक लागू होते हैं तो सरकार को बार-बार पुराने नोट बदलने की आवश्यकता कम पड़ेगी। इससे मुद्रण, परिवहन और नष्ट किए गए नोटों के प्रबंधन पर होने वाला खर्च घट सकता है। लंबे समय में यह व्यवस्था सरकारी संसाधनों की बचत में भी सहायक होगी।आम लोगों के लिए भी यह बदलाव लाभकारी हो सकता है। अधिक टिकाऊ नोट होने के कारण फटे या खराब नोटों की समस्या कम होगी। साथ ही दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों को लंबे समय तक अच्छी गुणवत्ता वाले नोट उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
क्या जल्द बाजार में दिखाई देंगे प्लास्टिक नोट
फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक परीक्षण चरण में है और अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। परीक्षण के परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्लास्टिक नोटों को पूरे देश में लागू किया जाए या नहीं। यदि सभी मानक सफल रहते हैं तो आने वाले समय में दस और बीस रुपये के नए प्लास्टिक नोट बाजार में दिखाई दे सकते हैं। यह कदम भारतीय मुद्रा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला परीक्षण के परिणाम और आर्थिक व्यवहार्यता के आधार पर ही लिया जाएगा।