आज सुबह जो हुआ...सोनम वांगचुक पर भड़के अखिलेश यादव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर इक्कीस दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चिंता का माहौल बना है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े हुए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले इक्कीस दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले व्यक्ति के साथ इस प्रकार की कार्रवाई लोकतंत्र की भावना के विपरीत है और इससे देश की छवि पर भी असर पड़ सकता है।
जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद सियासत हुई तेज
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक पिछले इक्कीस दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। शनिवार सुबह प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस कार्रवाई के कुछ ही समय बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी।विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कई नेताओं का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी मांग रख रहा है, तो उसके साथ बल प्रयोग करने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव ने कहा- सुबह की घटना पूरे देश और दुनिया तक पहुंच गई
अखिलेश यादव ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को बलपूर्वक उनके आमरण अनशन स्थल से हटाया जाना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने लिखा कि शनिवार सुबह हुई यह घटना कुछ ही समय में पूरे देश और दुनिया तक पहुंच गई है। उनके अनुसार इस घटनाक्रम ने देश और विदेश में रहने वाले लोगों के बीच चिंता और असंतोष का वातावरण पैदा कर दिया है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। यदि ऐसे आंदोलनों को बल प्रयोग के माध्यम से समाप्त किया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देने की भी मांग की।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य कपड़ों में कुछ लोग अचानक आंदोलन स्थल पर पहुंचे और पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। उनका कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई नहीं दी, इसलिए कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए।अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन की जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी व्यक्ति को जबरन हटाने जैसी कार्रवाई की जाती है तो उससे जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे जनता के मन में किसी प्रकार का भ्रम या अविश्वास पैदा नहीं होगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहेगा।
सोनम वांगचुक की चिकित्सा न्यायिक निगरानी में कराने की मांग
अखिलेश यादव ने यह भी मांग की कि सोनम वांगचुक का उपचार पूरी पारदर्शिता और न्यायिक निगरानी में कराया जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से आमरण अनशन पर बैठे व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती है। इसलिए उनकी चिकित्सा प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक केवल एक आंदोलनकारी नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार, वैज्ञानिक सोच और युवाओं को प्रेरित करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व हैं। ऐसे व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर सरकार को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार को संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए, न कि बल प्रयोग के रास्ते पर चलना चाहिए।अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि इस घटना को पूरी दुनिया देख रही है और इससे भारत की लोकतांत्रिक छवि प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि भारत की पहचान लोकतंत्र, संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलनों के सम्मान के कारण रही है। इसलिए सरकार को ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए।
महात्मा गांधी के सिद्धांतों का किया उल्लेख
अपने वक्तव्य में अखिलेश यादव ने महात्मा गांधी के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा अहिंसा, सत्य और संवाद पर आधारित रही है। यदि किसी भी आंदोलन का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाएगा तो यह गांधीवादी मूल्यों के विपरीत माना जाएगा।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार संवाद के बजाय टकराव की राजनीति कर रही है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति को सम्मान दिया जाना चाहिए, क्योंकि यही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति होती है। यदि सरकार विरोध के प्रत्येक स्वर को दबाने का प्रयास करेगी तो लोकतंत्र की भावना कमजोर होगी।
नई पीढ़ी और सामाजिक आंदोलनों पर भी रखी अपनी राय
अखिलेश यादव ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक और सक्रिय है। आधुनिक संचार माध्यमों के कारण कोई भी घटना कुछ ही समय में देश और दुनिया तक पहुंच जाती है। इसलिए किसी भी आंदोलन को केवल प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से समाप्त करना संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि विचारों और जनभावनाओं को दबाया नहीं जा सकता। यदि किसी मुद्दे पर लोगों के बीच व्यापक समर्थन है तो वह किसी न किसी रूप में सामने आता ही है। इसलिए सरकार को जनता की भावनाओं को समझते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, जिससे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।
विवाद के केंद्र में क्यों हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले इक्कीस दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे थे। उनके आंदोलन को लेकर लगातार सामाजिक संगठनों, छात्रों और कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिलता रहा। शनिवार सुबह प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।इस घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं। एक ओर सरकार की कार्रवाई को स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।