पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाशमणि त्रिपाठी का निधन:गुड़गांव के वेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस, दो बार देवरिया से सांसद चुने गए थे
देवरिया के पूर्व सांसद और भारतीय सेना के पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने गुरुग्राम के वेदांता अस्पताल में सुबह 11:45 बजे अंतिम सांस ली। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से गृह क्षेत्र बरपार गांव सहित देवरिया में शोक की लहर है। उनके पुत्र शशांक मणि त्रिपाठी वर्तमान में देवरिया से सांसद हैं। 1955 में सेना में हुए थे कमीशंड श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी मूल रूप से देवरिया जिले के बरपार गांव के रहने वाले थे। जून 1955 में उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला था। लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और उप सेना प्रमुख के पद तक पहुंचे। 1971 के युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के दौरान उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा नागालैंड और मिजोरम में चलाए गए सैन्य अभियानों में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई। देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए वर्ष 1986 में अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और 1992 में परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम) से सम्मानित किया गया।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी ने राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1996 में 11वीं लोकसभा के चुनाव में वह पहली बार देवरिया से सांसद चुने गए। इसके बाद 1999 में 13वीं लोकसभा के चुनाव में दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने वर्ष 2004 तक सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद की कई महत्वपूर्ण समितियों में रहे सदस्य सांसद रहते हुए उन्होंने संसद की गृह मामलों की समिति, आचार समिति और रेलवे परामर्शदात्री समिति सहित कई समितियों में सदस्य के रूप में काम किया। सैन्य सेवा से लेकर संसदीय राजनीति तक उनका लंबा सार्वजनिक जीवन रहा। उनके निधन से देवरिया ने एक पूर्व सैन्य अधिकारी और पूर्व जनप्रतिनिधि को खो दिया।
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