रिश्वत के आरोपी जूनियर असिस्टेंट की जमानत मंजूर:हाईकोर्ट ने फतेहपुर के मामले में दी राहत, अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप निबंधक कार्यालय खागा (फतेहपुर) में तैनात जूनियर असिस्टेंट राहुल कुमार बौद्ध को रिश्वत लेने के मामले में सशर्त जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया। क्या है मामला जानिये आरोप है कि आवेदक ने 1,20,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद ट्रैप टीम गठित की गई, जिसने उसे 1,00,000 रुपये के साथ पकड़ा। उसके विरुद्ध थाना खागा, जिला फतेहपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज है। वह 11 अगस्त 2026 से जेल में है। याची के अधिवक्ता ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, लेकिन सरकार से अभियोजन स्वीकृति अब तक नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपपत्र के बाद और अभियोजन स्वीकृति लंबित रहने के आधार पर जमानत दी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 7 के तहत अधिकतम सजा सात वर्ष है और मामला संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। "जमानत नियम है, जेल अपवाद" कोर्ट ने "जमानत नियम है, जेल अपवाद" के सिद्धांत को दोहराया, और कहा कि जमानत का उद्देश्य ट्रायल में अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने माना कि आवेदक जमानत का पात्र है। आवेदक को एक व्यक्तिगत बंधपत्र और दो जमानती देने होंगे।
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