रसोई के कचरे से बनेगी बायोगैस, बनेगा खाना:CSJMU के गर्ल्स हॉस्टल में शुरु हुआ प्लांच, रोज 50 किलो कचरे का होगा उपयोग

Nov 03, 2026 - 16:38
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रसोई के कचरे से बनेगी बायोगैस, बनेगा खाना:CSJMU के गर्ल्स हॉस्टल में शुरु हुआ प्लांच, रोज 50 किलो कचरे का होगा उपयोग
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सरस्वती गर्ल्स हॉस्टल में मंगलवार को बायोगैस संयंत्र का शुभारंभ किया गया। इस संयंत्र के माध्यम से हॉस्टल की रसोई और मेस से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग बायोगैस और जैविक खाद बनाने में किया जाएगा। इससे एक ओर कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कचरे को संसाधन के रुप में देखने की जरुरत वीसी प्रो. विनय पाठक ने कहा कि कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में देखने की जरूरत है। रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करना पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे नवाचारों से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग का रास्ता खुलता है। 5-10 घनमीटर गैस का उत्पादन होगा विश्वविद्यालय में स्थापित यह संयंत्र 'वेस्ट टू एनर्जी और वेस्ट टू वेल्थ' की अवधारणा पर आधारित है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 25 से 50 किलोग्राम रसोई के जैविक कचरे के प्रसंस्करण की है। इससे प्रतिदिन लगभग 5 से 10 घन मीटर कच्ची बायोगैस का उत्पादन किया जा सकेगा। दो उपयोगी उत्पाद मिलेंगे इस प्रक्रिया के बाद बचने वाले अर्धतरल पदार्थ को समृद्ध जैविक खाद के रूप में एकत्र किया जाएगा। इसका उपयोग पौधों के पोषण और कृषि कार्यों में किया जा सकेगा। इस प्रकार संयंत्र से कचरे का निस्तारण होने के साथ ऊर्जा और खाद, दोनों उपयोगी उत्पाद प्राप्त होंगे। इस मौके पर प्रो. वर्षा गुप्ता, डॉ. अजय पाण्डेय, प्रो. बीपी सिंह, डॉ. श्रवण कटियार आदि रहे।

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