नीट छात्रा के पिता बोले, जाने कहां कमी रह गई:कोई दबाव नहीं था, मैंने खुद कहा था जो चाहो बनो

Nov 03, 2026 - 16:55
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नीट छात्रा के पिता बोले, जाने कहां कमी रह गई:कोई दबाव नहीं था, मैंने खुद कहा था जो चाहो बनो
प्रयागराज के त्रिवेणीपुरम, झूंसी में लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर सुसाइड करने वाली नीट छात्रा रितु शर्मा के परिजन भी उसके इस कदम से स्तबध दिखे। मोर्चरी पर नम आंखों से पिता ने कहा, कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। कोई दबाव नहीं बनाया। मैं खुद कहता था कि जो चाहो बनो। सरकारी कॉलेज नहीं मिलेगा तो प्राइवेट में एडिमशन करा देंगे। इसके बावजूद न जाने कहां कमी रह गई। पिता देवराज शर्मा एनएचएआई से रिटायर हैं। मोर्चरी पर वह एकटक शून्य को निहारते रहे। पूछने पर बोले, अब कुछ कहने को नहीं है। बेटी को आखिरी बार कब देखा, इस सवाल पर बोले-रोजाना ही रात में खाना खाने के बाद वह पढ़ने बैठती थी। रात भर पढ़ाई करती थी। कभी-कभी सुबह नींद खुलने के बाद भी वह पढ़ते ही दिखाई देती। इसके बाद दोपहर में देर तक सोती थी। सोमवार को भी दोपहर दो बजे तक वह बाहर नहीं आई। 2:30 बजे के करीब मैंने खुद जाकर दरवाजा नॉक किया। कोई जवाब नहीं मिला, तो सोचा कि वह सो रही होगी। शाम चार बजे के करीब एक बार फिर गया। कई बार दरवाजा नॉक किया लेकिन जवाब नहीं मिला। करीब आधे घंटे तक दरवाजा नॉक करता रहा। इसके बाद ऊपर की मंजिल पर रहने वाले भाई को बुलाया और बताया कि रितु दरवाजा नहीं खोल रही है। भाई ने भी कोशिश की लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद खिड़की का शीशा तोड़ा गया। भीतर झांककर देखा तो बेटी खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी। बगल में ही पिस्टल पड़ी थी। किसी तरह दरवाजा तोड़कर भीतर गए लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। जानकारी दी गई तो पुलिस आ गई। इसके बाद आगे की कार्रवाई हुई। मेरिटोरियस थी बेटी पिता ने बताया, बेटी मेरिटोरियस थी। हाईस्कूल उसने 93 परसेंट मार्क्स से पास किए थे। 12वीं में 80 परसेंट मार्क्स आए थे। शुरू से ही कहती थी कि डॉक्टर बनूंगी। यह उसका सपना था। दो साल से जी-तोड़ मेहनत कर रही थी। सेलेक्शन नहीं होने पर निराश भी थी। उसे यकीन था कि इस बार उसे सरकारी कॉलेज मिल जाएगा। दो राउंड की काउंसिलिंग में सफलता नहीं मिलने पर काफी निराश थी। फिर भी घरवालों ने उसे कभी कुछ नहीं कहा। यही कहा कि एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। मिली भी लेकिन अफसोस कि इसमें बहुत देर हो गई। पिस्टल कमरे से निकालकर ले गई पिता का कहना है कि पिस्टल उनके कमरे में रहती थी। वीपन आलमारी में रखा जाता था। उन्होंने कहा कि बेटी कब पिस्टल निकालकर अपने कमरे में ले गई, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। कमरा लॉक कर देती थी पिता ने बताया कि बेटी रितु कमरे से कभी-कभी ही बाहर आती थी। वह जब भी बाहर आती, तुरंत कमरा लॉक कर देती थी। एमबीबीएस में सेलेक्शन पाने के लिए उसने सबसे दूरी बना ली थी। बहुत कम बात करती थी। कभी किसी बीमारी का नहीं किया जिक्र घरवालों का कहना है कि बेटी ने कभी किसी बीमारी का जिक्र नहीं किया। यह कभी नहीं बताया कि वह किसी बात को लेकर परेशान है। सुसाइड नोट में OCD का जिक्र होने की बात पर पिता बोले- कभी घर में इसका जिक्र तक नहीं हुआ। रितु ने ऐसी कोई बात कभी अपनी मां से भी नहीं बताई। फिलहाल उनका यह भी कहना है कि उन्होंने सुसाइड नोट नहीं देखा।

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