विद्यापीठ में फूंका गया धीरेंद्र शास्त्री का पुतला:समाजवादी छात्रसभा ने कहा-श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा के केंद्र, गिरफ्तारी की मांग की
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में समाजवादी छात्रसभा ने प्रदर्शन किया। छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव राज सिंह यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री का पुतला फूंका और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धार्मिक मंचों से किसी भी देवी-देवता को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों। उन्होंने मामले की जांच कर धीरेंद्र शास्त्री की गिरफ्तारी और ऐसी कथाओं पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की मांग भी की। छात्रसभा नेताओं ने कहा- धार्मिक भावनाएं आहत करने वालों पर हो कार्रवाई प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राज सिंह यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। धार्मिक मंचों का इस्तेमाल समाज में सद्भाव और आस्था को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि देवी-देवताओं के स्वरूप की तुलना कर विवाद खड़ा करने के लिए। छात्रसभा ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों से समाज में वैमनस्य और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। 29 अक्टूबर धीरेंद्र शास्त्री ने की थी टिप्पणी दरअसल, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 29 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में वे कहते सुनाई दिए कि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े खड़े होते हैं। उनके पैर एक-दूसरे पर होते हैं, कमर झुकी रहती है और गर्दन टेढ़ी करके बांसुरी बजाते हैं। इसके उलट उन्होंने भगवान श्रीराम को सीधा खड़ा होने वाला बताया। शास्त्री ने अयोध्या और वृंदावन के नामों की तुलना करते हुए भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बांसुरी बजाना खेल है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं। वीडियो सामने आने के बाद ब्रज क्षेत्र के कई संतों और श्रद्धालुओं ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद 2 नवंबर मांगी माफी विरोध बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 नवंबर को वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने या श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद पैदा करने का कोई इरादा नहीं था। वे स्वयं ठाकुरजी और ब्रज के भक्त हैं। उन्होंने कहा कि वे एक संत के प्रचलित पद की व्याख्या कर रहे थे, जिसमें बांसुरी बजाने और धनुष चलाने का उल्लेख है। शास्त्री ने यह भी कहा कि उनकी बात को संदर्भ से अलग करके देखा गया। यदि उनकी बातों से किसी की भावना आहत हुई है तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं।
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