सिम बॉक्स पर ‘मेड इन चाइना’ की मुहर:साउंड एम्पलीफायर के नाम पर लाए जाने का शक, CCTV से आने-जाने वालों पर रखते थे नजर

Nov 02, 2026 - 23:13
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सिम बॉक्स पर ‘मेड इन चाइना’ की मुहर:साउंड एम्पलीफायर के नाम पर लाए जाने का शक, CCTV से आने-जाने वालों पर रखते थे नजर
लखनऊ में अवैध रूप से संचालित SIM Box के मामले में पुलिस की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस को बरामद 6 SIM Box में 32-32 पोर्ट मिले हैं। इनसे 192 ई-सिम सक्रिय पाई गई हैं। उपकरणों पर ‘Made in China’ लिखा है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने घर के मुख्य गेट पर CCTV कैमरा लगाने के बजाय Wi-Fi से कनेक्टेड फेस डोर बेल लगा रखी थी। इसके जरिए घर में आने-जाने वालों की जानकारी रखते थे। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि SIM Box के साथ राउटर, वीपीएन गेटवे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व नेटवर्किंग उपकरण बरामद किए गए हैं। तलाशी के दौरान साउंड एम्पलीफायर के अलग-अलग पुर्जे और उनसे जुड़ी सामग्री भी मिली है। आशंका है कि अवैध SIM Box को साउंड एम्पलीफायर के रूप में दिखाकर भारत लाया गया। पुलिस उपकरणों के स्रोत, सप्लाई चेन और भारत में इनके प्रवेश के तरीके की जांच कर रही है। बरामद उपकरणों का विवरण जुटाने के लिए संबंधित टेलीकॉम कंपनियों से भी पत्राचार किया गया है। भारतीय नंबर से विदेश में बैठकर कर सकते थे कॉल SIM Box ऐसा दूरसंचार उपकरण है, जिसमें एक साथ कई SIM कार्ड लगाए जा सकते हैं। इसके जरिए इंटरनेट से आने वाली कॉल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर विदेश में बैठा साइबर अपराधी इंटरनेट के जरिए भारत में लगे SIM Box तक कॉल पहुंचा सकता है। इसके बाद भारतीय SIM के माध्यम से पीड़ित को कॉल की जाती है। ऐसे में पीड़ित को भारतीय मोबाइल नंबर से कॉल आती दिखाई देती है, जबकि कॉल करने वाला विदेश में बैठा हो सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल कॉल के वास्तविक स्रोत को छिपाने और बड़े पैमाने पर कॉल करने के लिए किया जा सकता है। डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी और पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के एंगल से भी जांच पुलिस इस मामले को केवल साइबर ठगी तक सीमित मानकर जांच नहीं कर रही है। अनधिकृत दूरसंचार उपकरणों का इस्तेमाल संगठित अपराध और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में भी किया जा सकता है। इनके जरिए संचार के वास्तविक स्रोत और पहचान को छिपाया जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष संगठन या नेटवर्क से इनके संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। NCRP और I4C से होगा देशभर की शिकायतों का मिलान बरामद SIM Box और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के IMEI समेत तकनीकी पहचान संबंधी विवरणों की जांच की जा रही है। इनका राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों से मिलान कराया जा रहा है। इसके अलावा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साथ भी तकनीकी जानकारियां साझा की जा रही हैं। इससे पता लगाया जाएगा कि इन उपकरणों या इनसे जुड़े नंबरों का इस्तेमाल देश के दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों में तो नहीं हुआ है। 4 से ज्यादा SIM क्षमता वाले उपकरणों पर विशेष नियम पुलिस के मुताबिक, भारत सरकार के Telecommunications (Radio Equipment Possession Authorisation) Rules, 2026 के तहत चार से अधिक SIM की क्षमता वाले संबंधित रेडियो उपकरणों का कब्जा और उपयोग आवश्यक प्राधिकरण एवं नियमों के अधीन है। बरामद उपकरण 32-पोर्ट वाले हैं। ऐसे में इनके भारत आने के माध्यम, स्रोत, वैधानिक अनुमति और इस्तेमाल की विस्तृत जांच की जा रही है। मकान मालिकों से किरायेदारों के सत्यापन की अपील पुलिस कमिश्नरेट ने मकान मालिकों और संपत्ति स्वामियों से किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील की है। किराये पर दिए गए मकान, फ्लैट या कमरे का समय-समय पर निरीक्षण करने को कहा है। पुलिस ने चेताया है कि कोई व्यक्ति बाजार दर से असामान्य रूप से अधिक किराया देने की पेशकश करे, परिसर के इस्तेमाल की स्पष्ट जानकारी न दे या वहां बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक और नेटवर्किंग उपकरण लगाए तो सतर्क रहें। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दें।

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