वेद विद्यालय में चंद्र पूजन:सामवेदाचार्य ब्रजमोहन पाण्डेय ने बताया शरद पूर्णिमा पर खीर का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा पर झूसी स्थित श्री स्वामी नरोत्तमानन्द गिरि वेद विद्यालय में वेद छात्रों ने वैदिक विधि से चंद्रमा का पूजन किया। दूध-चावल से बनी खीर का भोग लगाकर सूर्योदय से पहले प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसे कोजागरी और रास पूर्णिमा भी कहते हैं। सामवेदाचार्य ब्रजमोहन पाण्डेय ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। गीता के पुरुषोत्तमयोग अध्याय के 15वें श्लोक का उल्लेख करते हुए उन्होंने चंद्रमा को वनस्पतियों के जीवन-रस और पोषण का आधार बताया। उन्होंने सामवेद के मंत्रों के माध्यम से खीर को अमृत तत्व प्रदान करने की मान्यता भी बताई। आचार्य अवनीश पाण्डेय ने ऋग्वेद के प्रथम मंडल के सूक्त 91 का उल्लेख करते हुए सोमदेव से रक्षा की प्रार्थना का महत्व बताया। मान्यता है कि इस रात कनकधारा स्तोत्र का पाठ, ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप तथा चंद्रमा, शिव और कुबेर मंत्रों का जाप सुख-समृद्धि और मानसिक शांति के लिए किया जाता है।
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