बंगाल विधानसभा ने बदला ओबीसी आरक्षण, नया कानून पारित

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित कर दिए हैं, जिसके तहत कोटा 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही बिना सर्वे शामिल किए गए 113 वर्गों को सूची से हटा दिया गया है, जबकि 66 वर्गों को आरक्षण लाभ जारी रहेगा। यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है।

बंगाल विधानसभा ने बदला ओबीसी आरक्षण, नया कानून पारित

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 30 जून 2026

पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए विधानसभा ने सोमवार को दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी। इन विधेयकों के लागू होने के बाद राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का प्रतिशत 17 से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही बिना किसी फील्ड सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन के आरक्षण सूची में शामिल किए गए 113 वर्गों को सूची से बाहर कर दिया गया है।सरकार का कहना है कि यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है और इसका उद्देश्य आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, कानूनी और न्यायसंगत बनाना है।

विधानसभा में पारित हुए दो महत्वपूर्ण विधेयक

विधानसभा में जिन दो विधेयकों को पारित किया गया उनमें पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण संशोधन विधेयक 2026 तथा पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं।इन दोनों विधेयकों के माध्यम से राज्य की आरक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे आरक्षण प्रणाली को कानूनी चुनौतियों से बचाने और वास्तविक पात्र समुदायों को लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

113 वर्ग सूची से बाहर

राज्य सरकार ने उन 113 समुदायों को ओबीसी सूची से हटा दिया है जिन्हें पूर्व में बिना किसी विस्तृत सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण के शामिल किया गया था।पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में बताया कि इन समुदायों को शामिल करने की प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। इसी वजह से अदालत ने उस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।उन्होंने कहा कि अब केवल उन्हीं समुदायों को सूची में रखा गया है जिनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का प्रमाण सर्वेक्षणों और अध्ययन के माध्यम से स्थापित हुआ है।

66 वर्गों को मिलेगा आरक्षण का लाभ

नए कानून के तहत 66 ऐसे उप-वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा जिन्हें विभिन्न सर्वेक्षणों और आयोग की सिफारिशों के आधार पर पिछड़ा वर्ग माना गया था।सरकार का कहना है कि इन समुदायों की पात्रता का वैज्ञानिक आधार मौजूद है, इसलिए उन्हें सूची में बरकरार रखा गया है।

क्यों करना पड़ा बदलाव

मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में 2010 के बाद ओबीसी सूची में शामिल किए गए 77 अतिरिक्त समुदायों को दिए गए ओबीसी दर्जे को रद्द कर दिया था।अदालत ने कहा था कि कई समुदायों को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सूची में शामिल किया गया था। अदालत ने इसे असंवैधानिक और अवैध करार दिया था।इस फैसले के बाद लगभग 12 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र प्रभावित हुए थे। हालांकि अदालत ने उन लोगों की नौकरियों और नियुक्तियों को सुरक्षित रखा था जो पहले ही इस आरक्षण के आधार पर रोजगार प्राप्त कर चुके थे।

आरक्षण सीमा पर भी नया प्रावधान

संशोधित कानून में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार भविष्य में आरक्षण प्रतिशत में बदलाव कर सकती है, लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक नहीं होगा।यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न न्यायालयों के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जोड़ा गया है।

पिछड़ा वर्ग आयोग को मिले अधिक अधिकार

नए कानून के तहत पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका को और मजबूत किया गया है।अब कोई भी समुदाय स्वयं को ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए आयोग के समक्ष आवेदन कर सकेगा। आयोग सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।इसके अलावा यदि किसी समुदाय को गलत तरीके से सूची में शामिल किया गया है या किसी पात्र समुदाय को बाहर रखा गया है तो उसकी शिकायत भी आयोग के पास की जा सकेगी।आयोग के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है।

विधानसभा में हुआ विरोध

विधेयकों को लेकर विधानसभा में तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्षी दलों और कुछ बागी विधायकों ने इसका विरोध किया और इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया।आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि इस विषय पर और व्यापक चर्चा की आवश्यकता थी तथा विधेयक को चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

यूसीसी को लेकर भी बढ़ी हलचल

विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। राज्य सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है।समिति को कुछ सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिशें देने को कहा गया है, जिसके आधार पर आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है।

पब्लिक सेफ्टी बिल भी पास

इसी सत्र में विधानसभा ने वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल 2026 भी पारित किया।इस कानून में असामाजिक गतिविधियों, हिंसा और दंगों पर नियंत्रण के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। कानून के तहत कुछ मामलों में बिना मुकदमे के 12 महीने तक निवारक हिरासत का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

ओबीसी आरक्षण में किया गया यह बदलाव आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।सरकार इसे न्यायालय के आदेशों का पालन और आरक्षण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पिछड़े वर्गों के अधिकारों में कटौती के रूप में पेश कर रहा है।आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और कानूनी चुनौतियां दोनों देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल राज्य में नई ओबीसी व्यवस्था लागू होने के साथ ही आरक्षण की पूरी संरचना एक नए स्वरूप में सामने आ गई है।