जंतर-मंतर जाएंगे मंत्री? छात्रों के सामने झुकी सरकार!
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने फिर बातचीत का प्रस्ताव दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों की सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान पर चर्चा करने को तैयार है। वहीं छात्र संगठन अपनी मांग पर कायम है कि सरकार के प्रतिनिधि जंतर-मंतर पहुंचकर ही बातचीत करें।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 जुलाई 2026
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र संगठन आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधियों को स्वयं प्रदर्शन स्थल पर आना होगा। वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि वह छात्रों की हर बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है और बातचीत के माध्यम से ही समाधान निकालना चाहती है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के लिए बातचीत का स्थान महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत कब और किस स्थान पर होती है।
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को लेकर देशभर में बढ़ता जा रहा है विरोध
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मामला लगातार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और राजधानी नई दिल्ली का जंतर-मंतर इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बन गया है। हजारों छात्र और उनके प्रतिनिधि लगातार धरने पर बैठे हुए हैं तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो युवाओं का व्यवस्था से विश्वास कमजोर होता है। इसी कारण छात्र केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधारों की भी मांग कर रहे हैं।इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। संसद के भीतर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सड़क पर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार पर इस विवाद का समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने छात्रों से की संवाद की अपील
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आंदोलन कर रहे छात्रों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ हर समय बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से समझती है और किसी भी प्रकार के संवाद से पीछे नहीं हटना चाहती।उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं और छात्र जब भी चाहें, जितने समय के लिए चाहें, अपनी सुविधा के अनुसार चर्चा कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य किसी पर अपनी बात थोपना नहीं, बल्कि सभी पक्षों को सुनकर एक ऐसा समाधान निकालना है जो छात्रों और देश दोनों के हित में हो।जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे मजबूत माध्यम होता है। यदि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी और समस्या के समाधान का रास्ता भी आसानी से निकलेगा।
जहां छात्र चाहेंगे, वहीं होगी बातचीत
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार बातचीत के स्थान को लेकर किसी प्रकार की शर्त नहीं रख रही है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र चाहें तो मंत्री आवास, मंत्रालय अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भी चर्चा की जा सकती है। सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात छात्रों की समस्याओं का समाधान है।उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। सरकार चाहती है कि छात्रों के प्रतिनिधियों और संबंधित मंत्रियों के बीच खुलकर बातचीत हो, ताकि प्रत्येक मांग पर विस्तार से विचार किया जा सके।उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे विषय को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं मानती। यदि बातचीत से समाधान निकलता है तो सरकार हर संभव सहयोग करने के लिए तैयार है। सरकार का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद का वातावरण तैयार करना है।
प्रधानमंत्री युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के दोषियों के विरुद्ध त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से शीघ्र कार्रवाई की जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।उन्होंने कहा कि सरकार केवल दोषियों को दंडित करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर सुधारों की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।जितेंद्र सिंह ने छात्रों से आग्रह किया कि वे सरकार पर विश्वास रखें और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने में सहयोग करें। उनका कहना था कि सरकार और छात्र मिलकर ही भविष्य के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार कर सकते हैं।
छात्र संगठन ने सरकार के सामने रखी अपनी शर्त
प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन ने सरकार के प्रस्ताव पर अपनी स्पष्ट शर्त रख दी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो उसे स्वयं जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों से बातचीत करनी चाहिए। उनका मानना है कि कई दिनों से सड़क पर बैठे छात्रों के बीच जाकर संवाद करना सरकार की जिम्मेदारी है।छात्र प्रतिनिधियों ने मंत्री आवास अथवा मंत्रालय में जाकर बातचीत करने के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि सरकार को पहले छात्रों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए।संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
सरकार का दावा- कई बार भेजा जा चुका है बातचीत का निमंत्रण
सरकार का कहना है कि छात्रों को अब तक कई बार औपचारिक रूप से बातचीत के लिए आमंत्रित किया जा चुका है। सरकार के अनुसार मंत्री आवास और मंत्रालय दोनों स्थानों पर बैठक के लिए समय देने का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अब तक छात्र संगठन की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।सरकार का कहना है कि वह किसी भी समय छात्रों के साथ बैठकर विस्तार से चर्चा करने को तैयार है। यदि छात्र अपनी बात रखेंगे तो सरकार भी उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि आंदोलन के साथ-साथ संवाद भी जरूरी है। केवल बातचीत के माध्यम से ही ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे छात्रों का विश्वास भी बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक भी लग सके।
क्या जल्द खत्म होगा गतिरोध
फिलहाल सरकार और छात्र संगठन दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार लगातार बातचीत की अपील कर रही है, जबकि छात्र संगठन चाहता है कि सरकार स्वयं जंतर-मंतर पहुंचकर बातचीत करे। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच स्थान को लेकर सहमति बनना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार और छात्र संगठन किसी साझा स्थान पर बातचीत के लिए सहमत हो जाते हैं, तो लंबे समय से चल रहे इस विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। लेकिन यदि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे, तो आंदोलन और राजनीतिक टकराव दोनों के और तेज होने की संभावना बनी रहेगी।