युवक को उठाने पहुंची पुलिस टीम को घेरा:प्रयागराज में भंग की चुकी SOG के जवानों की कार्रवाई पर हंगामा, बैरंग लौटना पड़ा
प्रयागराज के कीडगंज में रविवार रात खुद को एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) का सदस्य बताने वाले कुछ लोगों को एक युवक को गाड़ी में बैठाने की कोशिश करना भारी पड़ गया। युवक को ले जाने की कोशिश देखकर मौके पर जुटे लोगों ने जब कार्रवाई का आधार पूछा तो टीम ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तारी की बात कही। हालांकि, एफआईआर की कॉपी नहीं दिखाने पर वहां मौजूद अधिवक्ताओं ने गाड़ी घेर ली। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ। करीब एक घंटे तक चले विवाद के बाद मौके पर पहुंची कीडगंज और कैंट थाने की पुलिस के सामने मामला शांत हुआ। बताया जा रहा है कि युवक को ले जाने पहुंची टीम को अंत में खाली हाथ लौटना पड़ा। इस घटना ने पुलिस कमिश्नर की ओर से जिले की सभी एसओजी टीमों को भंग किए जाने के आदेश के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब एसओजी की टीमें भंग की जा चुकी हैं और उनमें तैनात पुलिसकर्मियों की दूसरी जगह पोस्टिंग कर दी गई है, तो फिर कुछ पुलिसकर्मी एसओजी के नाम पर कार्रवाई कैसे कर रहे हैं? एफआईआर की कॉपी मांगने पर घिरी गाड़ी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,रविवार रात नौ बजे के करीब कीडगंज क्षेत्र में कुछ लोग एक युवक को अपने साथ ले जाने पहुंचे थे। उन्होंने खुद को एसओजी टीम का सदस्य बताया और युवक को गाड़ी में बैठाने की कोशिश की। इस दौरान आसपास के लोगों ने उनसे पूछताछ की तो बताया गया कि युवक के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत है और इसी मामले में उसे गिरफ्तार किया जा रहा है। मौके पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी पहुंच गए। उन्होंने कार्रवाई से संबंधित एफआईआर की कॉपी दिखाने की मांग की। कॉपी नहीं दिखाए जाने पर अधिवक्ताओं ने टीम की गाड़ी घेर ली और विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जुट गई और हंगामा होने लगा। विवाद की सूचना मिलने पर कीडगंज और कैंट थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद स्थिति शांत हुई। हालांकि, इस दौरान युवक को ले जाने पहुंची टीम को वापस लौटना पड़ा। स्कॉर्पियो बेचने के नाम पर पांच लाख लेने की शिकायत पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूरा मामला पुरानी स्कॉर्पियो की खरीद-बिक्री से जुड़ा है। नोएडा के एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि प्रयागराज के एक व्यक्ति ने पुरानी स्कॉर्पियो बेचने के नाम पर उससे पांच लाख रुपये ले लिए थे। गाड़ी की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे प्रयागराज बुलाया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रयागराज आने के बाद भी उसे तीन-चार दिनों तक टरकाया जाता रहा और गाड़ी के कागजात ट्रांसफर नहीं कराए गए। इसी मामले में शिकायत के घेरे में आए व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा था, लेकिन वह नहीं आ रहा था। इसके बाद पुलिस टीम उसे लेने पहुंची थी। इसी दौरान कीडगंज में हंगामा हो गया। एसओजी भंग होने के बाद भी उसके नाम पर कार्रवाई क्यों? कीडगंज की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल एसओजी के नाम पर कार्रवाई को लेकर खड़ा हो गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने अगस्त में जनपदीय समेत जिले की सभी एसओजी टीमों को भंग कर दिया था। इसके बाद इन टीमों में तैनात पुलिसकर्मियों की अलग-अलग स्थानों पर पोस्टिंग भी कर दी गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब एसओजी की टीमें आधिकारिक तौर पर भंग की जा चुकी हैं, तो फिर पूर्व में इन टीमों में तैनात रहे पुलिसकर्मी एसओजी के नाम पर कार्रवाई कैसे कर रहे हैं? क्या उन्हें इस तरह की कार्रवाई करने के लिए कोई अलग जिम्मेदारी दी गई है या फिर वे पुराने नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं? इ गंगानगर क्षेत्र में तैनात रहे पुलिसकर्मी पर भी उठे सवाल एसओजी के नाम पर पुलिसकर्मियों के सक्रिय रहने का मुद्दा इससे पहले भी चर्चा में रहा है। जानकारी के मुताबिक, एसओजी गंगानगर में तैनात रहे एक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल होने के बाद उसे लाइन हाजिर किया गया था। इसके बावजूद उसके एसओजी में तैनात होने का हवाला देकर पूरे क्षेत्र में घूमने की बात कही जा रही है। एसीपी बोले- कैंट थाने से संबंधित मामले में पहुंची थी पुलिस टीम इस मामले में एसीपी कर्नलगंज विवेक कुमार यादव ने बताया कि कैंट थाने से संबंधित प्रकरण में पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। बाद में मामला शांत हो गया।
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