क्या निजता कानून से खोजी पत्रकारिता पर लगेगी लगाम
निजता कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर 21 मीडिया संस्थानों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
डिजिटल व्यक्तिगत आंकड़ा संरक्षण अधिनियम, 2023 को लेकर मीडिया संस्थानों ने चिंता जताई है कि इससे खोजी पत्रकारिता और भ्रष्टाचार उजागर करने वाले समाचारों पर असर पड़ सकता है। डिजिटल समाचार प्रकाशक संघ के नेतृत्व में 21 मीडिया संस्थानों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। हालांकि, न्यायालय ने फिलहाल कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।
मीडिया संस्थानों की प्रमुख आपत्ति है कि कानून में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं है। उनका कहना है कि किसी मामले की जांच से पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति लेने की आवश्यकता से सबूत जुटाना मुश्किल हो सकता है और गोपनीय समाचार स्रोतों की पहचान उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, व्यक्तिगत आंकड़े मिटाने के अधिकार और सूचना का अधिकार अधिनियम में हुए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मीडिया संस्थानों को आशंका है कि इन प्रावधानों के कारण जनहित से जुड़ी खबरों को हटाने या सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में कठिनाई हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय ने निजता की रक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अब अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे विचार होगा। फिलहाल कानून पर कोई रोक नहीं लगी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
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