AMU छात्रसंघ चुनाव: प्रत्याशियों के भाषणों से वैचारिक जंग:उमर खालिद-शरजील इमाम के समर्थन पर गरमाई सियासत, नोमान अशरफ और इंतखाब के भाषणों में उठा उमर खालिद, शरजील इमाम और आफरीन फातिमा का मुद्दा
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अब मुकाबला सिर्फ अध्यक्ष और अन्य पदों की दावेदारी तक सीमित नहीं रह गया है। प्रचार के बीच उमर खालिद, शरजील इमाम और आफरीन फातिमा के समर्थन का मुद्दा भी गरमा गया है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी नोमान अशरफ और इंतखाब के भाषणों में इन नामों का जिक्र सामने आने के बाद चुनावी बहस का दायरा कैंपस से बाहर तक पहुंच गया है। प्रत्याशी जहां इनके मामलों में जल्द सुनवाई, हिरासत और कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कर रहे हैं, वहीं इन बयानों ने छात्रसंघ चुनाव में सियासी और वैचारिक मुद्दों की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है।
प्रचार सभाओं में उठ रहे कैंपस से बाहर के मुद्दे
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव को लेकर हॉल और हॉस्टल में प्रत्याशियों की बैठकें और सभाएं हो रही हैं। इन सभाओं में छात्र समस्याओं, छात्रसंघ की बहाली और विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित मामलों को भी जगह दी जा रही है। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर सामने आए भाषणों के वीडियो चर्चा में हैं। इनमें अध्यक्ष पद के प्रत्याशी नोमान अशरफ ने उमर खालिद, शरजील इमाम और आफरीन फातिमा का जिक्र करते हुए उनके समर्थन में आवाज बुलंद करने की बात कही है।
नोमान अशरफ ने उमर खालिद और शरजील इमाम को सिस्टम से पीड़ित बताते हुए उनके मुकदमों की जल्द सुनवाई की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल जल्द शुरू नहीं हुआ तो उनके हक में आवाज उठाई जाएगी। उनके संबोधन में आफरीन फातिमा का भी उल्लेख किया गया। इस तरह प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में ऐसे नाम और मुद्दे शामिल हो रहे हैं, जिनका संबंध विश्वविद्यालय परिसर से आगे राष्ट्रीय राजनीति, नागरिकता कानूनों के विरोध और कानूनी लड़ाइयों तक जाता है।
इंतखाब ने भी हिरासत और ट्रायल का मुद्दा उठाया
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी इंतखाब के भाषण का वीडियो भी सामने आया है। इसमें वह उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में आवाज उठाने तथा कथित गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ बोलने की बात करते नजर आते हैं। उन्होंने ट्रायल में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि सुनवाई शुरू नहीं होती है तो उनके पक्ष में आवाज बुलंद की जाएगी।
दोनों प्रत्याशियों के भाषणों में इन नामों का उल्लेख चुनावी प्रचार के दौरान राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच इन बयानों की चर्चा है। हालांकि, इन मुद्दों का छात्र मतदाताओं पर कितना असर पड़ेगा, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
सीएए-एनआरसी आंदोलन से जुड़ा है शरजील इमाम का अलीगढ़ कनेक्शन
शरजील इमाम का नाम नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध के दौरान चर्चा में आया था। वह एएमयू में भी भाषण दे चुके हैं। उनके भाषणों को लेकर अलीगढ़ में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में भी मामले दर्ज हुए। इन मामलों के कारण शरजील लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं।
उमर खालिद पर दिल्ली दंगों की साजिश का मामला
उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। वह सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन के दौरान प्रमुख रूप से चर्चा में आए थे। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने आरोपों से इनकार किया है और उनके मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया तथा जमानत को लेकर भी बहस होती रही है।
छात्रसंघ चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों की एंट्री
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशी अब विश्वविद्यालय की समस्याओं के साथ उन मुद्दों को भी उठा रहे हैं, जिन पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और वैचारिक मतभेद रहे हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में दिए गए बयान इसी चुनावी विमर्श का हिस्सा हैं। एक तरफ प्रत्याशी सुनवाई में तेजी और अधिकारों की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ इन बयानों के जरिए चुनाव प्रचार का दायरा कैंपस से बाहर तक जाता दिख रहा है। अब देखना होगा कि छात्र मतदाता इन मुद्दों को कितना महत्व देते हैं और उनका असर चुनावी समीकरणों पर किस हद तक पड़ता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)