33%कमीशन मामले में अब मंडलीय स्तर पर भी होगी जांच:सिद्धार्थनगर में DM बोले- JE ने कहा था- ऊपर तक कमीशन देते हैं

Oct 28, 2026 - 10:07
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33%कमीशन मामले में अब मंडलीय स्तर पर भी होगी जांच:सिद्धार्थनगर में DM बोले- JE ने कहा था- ऊपर तक कमीशन देते हैं
सिंचाई विभाग निर्माण खंड में कथित 33 प्रतिशत कमीशनखोरी के मामले में अब मंडलीय स्तर पर भी जांच कराई जाएगी। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा है कि वह जिला स्तर पर हुई जांच की आख्या भी मंगवाएंगे। चूंकि यह मामला अधिशासी अभियंता से भी जुड़ा है, इसलिए मंडलीय स्तर पर जांच कराने की सिफारिश की गई है। जांच पूरी होने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी। डीएम के इस बयान के बाद करीब पांच महीने से लंबित इस मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। 10 जून 2026 को सामने आए एक वीडियो में जेई संजय रौनियार एक व्यक्ति से बातचीत के दौरान ठेकेदारों से 33 प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने की बात कहते सुनाई दिए थे। बातचीत में अधिशासी अभियंता सतीश कुमार को 4 प्रतिशत हिस्सा दिए जाने का भी जिक्र था। वीडियो सामने आने के बाद सिंचाई विभाग में कथित कमीशन के बंटवारे को लेकर सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। इसके बावजूद लंबे समय तक जांच की प्रगति और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। डीएम बोले- जिला स्तर की जांच आख्या भी लेंगे मामले में जांच की स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन से बात की गई। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर हुई जांच की आख्या भी ली जाएगी। मामला अधिशासी अभियंता से जुड़ा होने के कारण मंडलीय स्तर पर भी जांच कराने की सिफारिश की गई है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डीएम के इस बयान से स्पष्ट है कि अब मामले में जिला स्तर की जांच के साथ मंडलीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, जिला स्तर की जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, जांच आख्या तैयार हुई है या नहीं और मंडलीय जांच किस स्तर पर शुरू होगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। प्रभारी मंत्री ने भी दिया था उच्चस्तरीय जांच का भरोसा इस मामले को दैनिक भास्कर की ओर से जिले के प्रभारी मंत्री अनिल राजभर के सामने भी उठाया गया था। उन्हें वीडियो में कथित तौर पर 33 प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने और अधिशासी अभियंता सतीश कुमार को 4 प्रतिशत हिस्सा मिलने की बात के बारे में बताया गया था। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया था कि जब कथित बातचीत में अधिशासी अभियंता का नाम सामने आया है, तो जांच की जिम्मेदारी उन्हीं को दिए जाने की स्थिति में निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी। इस पर प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने उच्चस्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया था। लेकिन इसके बाद भी जांच के परिणाम और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। अब डीएम ने जिला स्तर की जांच आख्या लेने और मंडलीय स्तर पर जांच की सिफारिश करने की बात कही है। जिस अधिकारी का नाम आया, जांच की निष्पक्षता पर उठे थे सवाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर है। वीडियो में अधिशासी अभियंता सतीश कुमार का नाम कथित कमीशन के संबंध में सामने आने के बाद जांच की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे थे। ऐसे में मंडलीय स्तर पर जांच की सिफारिश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जांच की जिम्मेदारी किस अधिकारी या टीम को सौंपी जाएगी और जांच कब तक पूरी होगी, इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह मामला केवल वीडियो में कही गई बातों तक सीमित नहीं है। यदि कथित कमीशनखोरी की पुष्टि होती है, तो इसका असर सरकारी निर्माण कार्यों की पारदर्शिता, भुगतान व्यवस्था और काम की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका की भी जांच जरूरी होगी। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो जांच के निष्कर्ष से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पांच महीने बाद अब जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का इंतजार 10 जून को वीडियो सामने आने के बाद जांच टीम गठित हुई। इसके बाद प्रभारी मंत्री के सामने मामला उठाया गया और उच्चस्तरीय जांच का भरोसा मिला। अब डीएम ने जिला स्तर की जांच आख्या लेने और मंडलीय स्तर पर जांच कराने की सिफारिश की बात कही है। ऐसे में अब सवाल है कि जिला स्तर की जांच में क्या सामने आया, मंडलीय जांच कब शुरू होगी और जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी कैसे तय की जाएगी। फिलहाल डीएम ने जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि करीब पांच महीने से लंबित इस मामले में जांच कब पूरी होती है और कथित कमीशनखोरी के आरोपों पर क्या नतीजा सामने आता है।

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