शामली के 4 नेता BJP की प्रदेश कार्यसमिति में शामिल:2027 चुनाव के लिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश, हारी हुई सीटें वापस पाने की चुनौती

Oct 28, 2026 - 10:07
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शामली के 4 नेता BJP की प्रदेश कार्यसमिति में शामिल:2027 चुनाव के लिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश, हारी हुई सीटें वापस पाने की चुनौती
शामली में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति में शामली जिले के चार नेताओं को शामिल किया है। पार्टी ने एमएलसी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व जिलाध्यक्ष पवन तरार, प्रमोद कुमार अट्टा और रमेश गौड़ कश्यप को प्रदेश कार्यसमिति में जगह दी है। इन नियुक्तियों को जिले में गुर्जर, जाट, सैनी और कश्यप समाज के बीच पार्टी का आधार मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से की गई इन नियुक्तियों के बाद जिले में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीनों सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है। साल- 2022 के चुनाव में तीनों सीटें गंवाने के बाद पार्टी संगठन में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। 2017 में दो सीटें जीतीं, 2022 में तीनों गंवाईं शामली जिले के गठन के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कैराना सीट पर हुकुम सिंह और थानाभवन सीट पर सुरेश राणा के रूप में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। शामली सीट कांग्रेस के पंकज मलिक के खाते में गई थी। साल- 2017 में भाजपा ने शामली और थानाभवन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कैराना सीट सपा के खाते में चली गई। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिले की तीनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। शामली और थानाभवन में रालोद तथा कैराना में सपा ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2027 के चुनाव में भाजपा के लिए खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना बड़ी चुनौती है। भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन के समीकरण भी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। संगठन में पहले से अलग-अलग समाजों को प्रतिनिधित्व भाजपा जिले में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए पहले भी संगठन और अन्य पदों पर विभिन्न वर्गों के नेताओं को जिम्मेदारी दे चुकी है। पार्टी ने जिलाध्यक्ष की कमान कश्यप समाज के रामजीलाल कश्यप को सौंपी है। जाट समाज में प्रभाव रखने वाले मोहित बेनीवाल भाजपा कोटे से एमएलसी हैं और प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। वहीं, राजपूत समाज से आने वाले पूर्व मंत्री सुरेश राणा भी प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। अब प्रदेश कार्यसमिति में चार नए चेहरों को शामिल कर पार्टी ने इस रणनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। अनुभव और सामाजिक प्रभाव के आधार पर जिम्मेदारी प्रदेश कार्यसमिति में शामिल वीरेंद्र सिंह गुर्जर गुर्जर समाज में प्रभाव रखते हैं। वह सात बार विधायक, दो बार एमएलसी और पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। सिलावर गांव निवासी पवन तरार भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। प्रमोद कुमार अट्टा सैनी समाज में प्रभाव रखते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वहीं, कैराना क्षेत्र के रमेश गौड़ कश्यप पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य हैं। चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश पार्टी की इस पहल को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन नियुक्तियों का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, यह पार्टी की रणनीति, स्थानीय समीकरणों और चुनावी प्रदर्शन से स्पष्ट होगा। भाजपा जिलाध्यक्ष रामजीलाल कश्यप का कहना है कि पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है।

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