पूर्वोत्तर में बाढ़ का कहर 100 से ज्यादा गांव जलमग्न

असम और अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। 100 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं, हजारों लोग प्रभावित हैं और कई प्रमुख सड़क तथा पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासन, वायुसेना और आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय हैं।

पूर्वोत्तर में बाढ़ का कहर 100 से ज्यादा गांव जलमग्न

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 जून 2026

पूर्वोत्तर भारत में मानसून की तेज बारिश ने व्यापक तबाही मचा दी है। अरुणाचल प्रदेश और असम के कई जिले बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि 100 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं, हजारों लोग प्रभावित हैं और कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान

अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। आपदा में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों के लापता होने की खबर है।भारतीय वायुसेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज बहाव वाले पानी ने सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।पूर्वी कामेंग और पक्के केसांग जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल टूट गया है, जिससे कई क्षेत्रों का संपर्क बाधित हो गया है। राज्य के कम से कम छह जिलों में यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

असम में बाढ़ की लहर से बढ़ी मुश्किलें

अरुणाचल प्रदेश से आने वाले बाढ़ के पानी ने असम में भी हालात गंभीर कर दिए हैं। धेमाजी, लखीमपुर, बिश्वनाथ और सोनितपुर समेत कई जिलों में बाढ़ का पानी फैल गया है।धेमाजी जिले में केमी नदी पर बना लगभग 300 मीटर लंबा लोहे का पुल तेज बहाव में बह गया। इस पुल के बहने से केमी-पुराना जेलोम क्षेत्र और जोनाई सदर के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया है। वहीं सिमेन नदी पर स्थित रेलवे पुल को भी नुकसान पहुंचा है।

100 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में

बाढ़ के कारण धेमाजी जिले और आसपास के इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ है। बहिर चिले ग्राम पंचायत के लगभग 40 गांव और बहिर जोनाई ग्राम पंचायत के 60 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार धेमाजी जिले के चार राजस्व सर्किलों में 69 गांवों के लगभग 16 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर 20 हजार से अधिक लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं।कई घरों में पानी घुस गया है, खेत जलमग्न हो गए हैं और बड़ी संख्या में पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें टूटने और पानी भरने के कारण आवागमन बाधित है।

राहत और बचाव कार्य तेज

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।असम सरकार ने कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। स्थानीय प्रशासन लगातार नदी जलस्तर और मौसम की स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है।

केंद्र सरकार ने लिया हालात का जायजा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और राहत सुनिश्चित करने में जुटी हुई है।

भूस्खलन में बाइकर बहा

अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले के सिजी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक ढहता दिखाई देता है और एक बाइकर मलबे के साथ नीचे बह जाता है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाइकर की जान बच गई, हालांकि उसकी चोटों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

मौसम विभाग की चेतावनी

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी है।पूर्वोत्तर भारत में मानसून के इस शुरुआती दौर की बाढ़ को इस वर्ष की पहली बड़ी प्राकृतिक चुनौती माना जा रहा है। प्रशासन के सामने राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है।