यूएन में गरजा भारत, बच्चों पर हमला करने वालों को दी सख्त चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने बच्चों और विद्यालयों पर हमले करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। भारत ने कहा कि जवाबदेही के बिना बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

यूएन में गरजा भारत, बच्चों पर हमला करने वालों को दी सख्त चेतावनी

दि राइजिंग न्यूज़ | न्यूयॉर्क | 26 जून 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने बच्चों और विद्यालयों पर होने वाले हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट कहा कि जो लोग बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाते हैं, उन्हें हर हाल में कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और युद्ध या संघर्ष जैसी परिस्थितियों में भी इसे बाधित नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने वैश्विक समुदाय से बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।


बच्चों पर हमले करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि केवल सुरक्षा की बातें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों और विद्यालयों पर हमला करने वालों को दंड नहीं मिलेगा तो ऐसे अपराध लगातार बढ़ते रहेंगे। भारत का मानना है कि न्याय और जवाबदेही के बिना बच्चों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे मामलों में एकजुट होकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।


युद्ध और संघर्ष में भी शिक्षा का अधिकार सुरक्षित रहे

भारत ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में छीना नहीं जाना चाहिए। युद्ध, आतंकवाद या सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। भारत ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि स्थायी शांति और बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। यदि बच्चों को शिक्षा से वंचित किया गया तो आने वाली पीढ़ियां भी हिंसा और अस्थिरता के दुष्चक्र में फंस सकती हैं।


संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ हिंसा के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में बच्चों के अधिकारों के 38 हजार से अधिक गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि हुई, जिनसे 24 हजार से अधिक बच्चे प्रभावित हुए। विद्यालयों पर हमलों में एक वर्ष के भीतर 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों ने वैश्विक समुदाय के सामने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।


संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में करोड़ों बच्चों का भविष्य संकट में

भारत ने बताया कि दुनिया भर में लगभग 47 करोड़ से अधिक बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जो युद्ध, हिंसा या विस्थापन से प्रभावित हैं। इनमें करोड़ों बच्चे आज भी विद्यालयों से दूर हैं और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। लगातार बढ़ते संघर्षों के कारण लाखों परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन बच्चों के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।


भारत ने दुनिया के सामने रखा अपना शिक्षा मॉडल

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने शिक्षा मॉडल का भी उल्लेख किया। भारत ने बताया कि देश में 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को संविधान के तहत निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखने के लिए भारत ने डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया और महामारी के दौरान भी लाखों बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई। भारत ने यह भी कहा कि शरणार्थी और विस्थापित बच्चों की शिक्षा में लगातार निवेश किया जा रहा है ताकि उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।


वैश्विक सहयोग पर दिया जोर

भारत ने स्पष्ट किया कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। भारत का मानना है कि जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिलेगी और बच्चों को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक वैश्विक शांति और विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा। संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने पूरी दुनिया से इस दिशा में ठोस और सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।