बलिया में मनाया गया 186वां स्थापना दिवस:परिवहन मंत्री बोले- आजादी की लड़ाई से विकास तक, जिले की पहचान संघर्ष और स्वाभिमान
बलिया का 186वां स्थापना दिवस रविवार को गंगा बहुद्देशीय सभागार में मनाया गया। कार्यक्रम दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ और शाम 6:45 बजे समाप्त हुआ। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बलिया का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। एक नवंबर 1988 को गाजीपुर से अलग होकर बलिया स्वतंत्र जिला बना था। उस समय जिले में तीन तहसीलें थीं। मंत्री ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में बलिया का योगदान रहा है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पांडेय ने देश का गौरव बढ़ाया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिया को आजाद होने का गौरव मिला। व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में भी जिले की भूमिका रही है। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने अपने विचारों से देश को नई दिशा दी। बलिया के लोगों ने प्रशासनिक, व्यावसायिक और सामाजिक क्षेत्रों में काम कर देश के अलग-अलग हिस्सों में जिले का मान बढ़ाया है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज, बाईपास, भृगु कॉरिडोर, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और गरीबों के लिए आवास से जुड़ी योजनाओं पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से जिले में सुविधाएं बढ़ेंगी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत दिखाई गई। इस दौरान जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, सीडीओ आलोक कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द दूबे, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, सीआरओ गुलशन, सीएमओ डॉक्टर अभय कुमार राय, डीडीओ आनंद प्रकाश और जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
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