ED की बड़ी कार्रवाई:आज़म खान 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए,1170 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लखनऊ क्षेत्रीय टीम ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के संस्थापक और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (रामपुर) के चांसलर मोहम्मद आज़म खान को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। PMLA अधिनियम 2002 के तहत 31 अक्टूबर 2026 को हुई इस गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। किसानों की जमीन पर कब्जे से शुरू हुई थी जांच ED ने अपनी यह जांच रामपुर के अजीम नगर थाने में जुलाई 2019 में दर्ज 26 मुकदमे के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि रामपुर के सिंगनखेड़ा गांव के किसानों को डरा-धमकाकर, मारपीट कर और अवैध रूप से बंधक बनाकर उनकी कृषि भूमि को यूनिवर्सिटी के नाम पर जबरन हस्तांतरित (बैनामा) कराया गया था। सरकारी फंड की हेराफेरी और ठेकेदारों से चंदा जांच के दौरान ED को पता चला कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आए सरकारी फंड और निर्माण सामग्री को जौहर यूनिवर्सिटी के निजी कैंपस में डाइवर्ट कर दिया गया था। इतना ही नहीं, जिन ठेकेदारों को सरकारी ठेके मिले थे, उनसे पैसों को चंदे (Donation) के रूप में वापस ट्रस्ट के खातों में रूट कराया गया था। ED की सूचना के बाद BNS 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत नई FIR दर्ज की गई, साथ ही लूट, रंगदारी, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी 28 अन्य FIR को भी जांच में शामिल किया गया है। 1170 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच इस मामले में कार्रवाई करते हुए ED ने 28 अक्टूबर 2026 को PMLA के तहत जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया था। कागजी तौर पर अटैच की गई इस संपत्ति का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये दर्ज है, जबकि वर्तमान में इसकी बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है। छापेमारी के बाद कार्रवाई, आगे की जांच जारी इससे पहले अगस्त 2026 में ED की टीमों ने रामपुर स्थित यूनिवर्सिटी परिसर और उससे जुड़े ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस (इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) बरामद हुए थे। एजेंसी का कहना है कि पूरे मामले में अभी आगे की जांच तेजी से जारी है।
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