बृजभूषण बोले- राहुल गांधी बिना पिए नशे में हैं:गोंडा में कहा- भगवंत मान पीते होंगे, लेकिन दिन में तो नहीं

Nov 06, 2026 - 09:27
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बृजभूषण बोले- राहुल गांधी बिना पिए नशे में हैं:गोंडा में कहा- भगवंत मान पीते होंगे, लेकिन दिन में तो नहीं
गोंडा के कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के मुंह से बदबू आने की बात कही थी। बृजभूषण शरण सिंह ने गुरुवार देर शाम करीब 6 बजे इस बयान पर प्रतिक्रिया दी। उनका बयान शुक्रवार सुबह 8:30 बजे सामने आया। बोले- भगवंत मान नशे में हैं या नहीं, राहुल गांधी जरूर नशे में हैं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पंजाब और हरियाणा कभी एक थे। खेल के क्षेत्र में यह इलाका सिरमौर था। बास्केटबॉल, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल और दौड़ जैसे खेलों में पंजाब ने देश को खिलाड़ी दिए हैं। लेकिन आज पंजाब भयंकर नशे की चपेट में आ गया है। पंजाब को नशामुक्त करने का सबसे पहले आह्वान देश के गृह मंत्री अमित शाह ने किया है। अमित शाह अगर कोई संकल्प लेते हैं तो बहुत सोच-समझकर लेते हैं। आज तक उन्होंने जो भी संकल्प लिए हैं, उन्हें पूरा किया है। राहुल गांधी के बयान पर उन्होंने कहा, "यह अच्छा कटाक्ष नहीं है। हम नहीं मानते कि वहां के मुख्यमंत्री के मुंह से बदबू आती होगी। पीते होंगे, लेकिन दिन में तो नहीं पीते होंगे। राहुल गांधी जी बिना पिए नशे में हैं। अगर वो पीकर नशे में हैं, तो ये बिना पिए नशे में हैं। इनका नशा उतरता ही नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी हर बार विवादित बयान देते हैं। उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने के सवाल पर बृजभूषण ने कहा, "91 चुनाव हारने का आपका रिकॉर्ड है। आपके नेतृत्व में शायद देश की कोई पार्टी इतना चुनाव हारी हो। तो मान साहब नशे में हैं कि नहीं हैं, राहुल जी जरूर नशे में हैं। उनको अपना नशा कम करना चाहिए और धरातल पर आकर जनता के मुद्दों को उठाना चाहिए।" अग्निवीर की सेवा अवधि दो साल बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया अग्निवीरों की सेवा अवधि दो साल बढ़ाए जाने को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सेना और युवाओं की मांग और आपूर्ति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि जब अग्निवीर कानून आया और इसे नौकरी से जोड़ा गया, तब थोड़ा विरोध हुआ था। लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां हर बच्चे के लिए सेना की ट्रेनिंग अनिवार्य है। ट्रेनिंग के बाद सेना में नौकरी मिलना जरूरी नहीं है। इसके बाद युवा अपनी पसंद के क्षेत्र में पढ़ाई, बिजनेस या खेल को चुन सकते हैं, लेकिन सेना की ट्रेनिंग अनिवार्य होती है।

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