डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के उपाय बताए:मेरठ में कार्यशाला; संतुलित आहार, नस्ल सुधार और लागत प्रबंधन पर जोर

Oct 28, 2026 - 19:24
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डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के उपाय बताए:मेरठ में कार्यशाला; संतुलित आहार, नस्ल सुधार और लागत प्रबंधन पर जोर
डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत पर नियंत्रण, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन जरूरी है। मेरठ के भाकृअनुप-केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में हुई एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने पशुपालकों को अच्छी नस्ल के पशु चुनने, संतुलित आहार देने, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी। संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार मोहंती के निर्देशन में कार्यशाला हुई। इसका आयोजन इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए), नॉर्थ जोन और वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर ने मिलकर किया। कार्यशाला का विषय था, “आत्मनिर्भरता से उद्यमिता तक: डेयरी को एक लाभदायक व्यवसाय में बदलना”। इसका मकसद किसानों और डेयरी उद्यमियों को वैज्ञानिक तरीकों और बेहतर प्रबंधन से आय बढ़ाने के बारे में जानकारी देना था। आईडीए, नॉर्थ जोन एवं वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के चेयरमैन डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल और गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण डेयरी से होने वाला मुनाफा बढ़ा सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की नंद बाबा जैसी योजनाओं का जिक्र किया और डेयरी क्षेत्र के विकास में उनकी भूमिका बताई। आईडीए के सेक्रेटरी जनरल श्री हरिओम गुलाटी ने अच्छी नस्ल, संतुलित आहार, सही देखभाल और नियमित स्वास्थ्य जांच को डेयरी व्यवसाय का आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की तकनीकी जानकारी बढ़ाने और किसानों, उद्यमियों व सरकार के बीच बेहतर तालमेल से दूध उत्पादन और आय में सुधार हो सकता है। आनंदा डेयरी के सीएमडी श्री आर.एस. दीक्षित ने पशुओं की उत्पादन क्षमता के अनुसार पोषण और देखभाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक योजना से डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है। आईडीए के अध्यक्ष श्री सुधीर कुमार सिंह ने दूध की गुणवत्ता और आर्थिक व्यवहार्यता के साथ किसान और उपभोक्ता, दोनों के हितों का ध्यान रखने की बात कही। तकनीकी सत्र में श्री पंकज शर्मा ने “दूध से कमाई, समझदारी से समृद्धि: डेयरी उद्यमिता की नई राह” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने डेयरी व्यवसाय में लागत प्रबंधन और उद्यमिता की संभावनाओं पर बात की। पीसीडीएफ के सेवानिवृत्त प्रबंधक डॉ. प्रमोदकुमार ने कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में सुधार के उपायों की जानकारी दी।

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