ऑडी हादसा: हत्या के आरोप से पलटे पिता और चश्मदीद:पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष की ऑडी से हुई थी मौत,बोले- भीड़ की बातों में आकर दिया था बयान

Nov 07, 2026 - 18:20
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ऑडी हादसा: हत्या के आरोप से पलटे पिता और चश्मदीद:पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष की ऑडी से हुई थी मौत,बोले- भीड़ की बातों में आकर दिया था बयान
बन्नादेवी क्षेत्र में हलवाई मनोज सिंह की मौत के मामले में अब कहानी ने नया मोड़ ले लिया है। जिस घटना को लेकर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी देव राज सिंह के भतीजे विक्रांत को जेल भेजा गया, उसी मामले में अब मृतक के पिता और हादसे में घायल प्रत्यक्षदर्शी कन्हैया ने हत्या के आरोपों से किनारा कर लिया है। शनिवार को प्रेस वार्ता में दोनों ने मनोज की मौत को हादसा बताया और कहा कि किसी ने जानबूझकर गाड़ी चढ़ाकर उसकी हत्या नहीं की थी। मृतक के पिता गुड्डू सिंह और कन्हैया का कहना है कि 20 अक्टूबर की रात हुई घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़ और स्थानीय लोगों की बातों में आकर उन्होंने ऑडी चालक पर दोबारा गाड़ी चढ़ाकर मनोज को कुचलने का आरोप लगा दिया था। उस समय घटनाक्रम को लेकर उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। बाद में वास्तविक स्थिति समझ में आने पर अब वे मीडिया के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं। दरअसल, हादसे की रात मनोज और कन्हैया बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान ऑडी कार की चपेट में आने से दोनों घायल हो गए थे। कुछ देर बाद मनोज की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया था। फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के शुरुआती आरोपों के आधार पर दुर्घटना के बाद मनोज को दोबारा कुचलने की बात सामने आई थी। इसी आरोप के आधार पर पुलिस ने हत्या की धारा 103 बीएनएस में मुकदमा दर्ज कर विक्रांत को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया था। अब पिता और घायल प्रत्यक्षदर्शी के बदले हुए बयानों से मामले में नया कानूनी मोड़ आने की संभावना है। बयानों से बदल सकती है मुकदमे की दिशा मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में परिवार और प्रत्यक्षदर्शी के ताजा बयान बचाव पक्ष के लिए अहम हो सकते हैं। इन बयानों को आधार बनाकर आरोपी पक्ष हत्या के आरोपों को चुनौती देने और जमानत की राह आसान करने का प्रयास कर सकता है। वहीं, विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों और नए बयानों के आधार पर पुलिस के स्तर से मुकदमे को हत्या की धाराओं से दुर्घटना संबंधी धाराओं में तरमीम करने की प्रक्रिया भी संभव है। हालांकि, यह बदलाव स्वतः नहीं होगा। पुलिस की विवेचना, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, अन्य साक्ष्य और न्यायालय में पेश तथ्यों के आधार पर ही मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी। सीओ द्वितीय धनंजय का कहना है कि मामला अभी विवेचना में है।

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