दीपावली से पहले मिट्टी के दीये खरीदने पहुंचे लोग:लखीमपुर खीरी के बाजारों में सुबह से रही ग्राहकों की आवाजाही, लोगों ने कहा- दीयों के बिना दिवाली सूनी
लखीमपुर खीरी में दीपावली से एक दिन पहले शनिवार को लोग घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये खरीदने बाजार पहुंचे। बिजली की झालरों और आधुनिक सजावट के बीच दीयों की दुकानों पर सुबह से ग्राहकों की आवाजाही रही। धनतेरस पर शुक्रवार को लोगों ने सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, वाहन और अन्य सामान खरीदे। ऑटोमोबाइल, सराफा और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की दुकानों पर भी रौनक रही। शनिवार को लोगों ने दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। पूजा और घरों की सजावट के लिए खरीदे दीये कुछ लोगों ने पूजा के लिए छोटे दीये खरीदे, तो कुछ ने आंगन, छत, बालकनी और दरवाजे सजाने के लिए बड़ी संख्या में मिट्टी के दीपक लिए। बाजार में साधारण दीयों के साथ रंग-बिरंगे और अलग-अलग डिजाइन वाले दीपक भी बिक रहे थे। दीये खरीद रहे लोगों ने कहा कि घरों में बिजली की रंग-बिरंगी झालरों, एलईडी लाइट और सजावटी लाइटों का चलन बढ़ा है, लेकिन मिट्टी के दीयों की जगह कोई नहीं ले सकता। उनके मुताबिक, दीये में तेल डालकर बाती जलाने से ही दीपावली का असली एहसास होता है। दीयों की बिक्री से कुम्हारों को मिलती है आमदनी दीपावली पर मिट्टी के दीये खरीदने से कुम्हारों और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों को भी काम मिलता है। त्योहार से पहले कारीगर मिट्टी को आकार देकर दीये बनाते हैं, उन्हें सुखाते और पकाते हैं, फिर बाजार तक पहुंचाते हैं। दीयों की बिक्री से कुम्हार परिवारों को अतिरिक्त आमदनी होती है।
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