भारत-रत्न के मकान ध्वस्तीकरण से VDA-प्रशासन का संबंध नहीं:फेसबुक और एक्स पर की जा रही पोस्ट पर वीडीए सचिव ने दी सफाई

Nov 07, 2026 - 18:04
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भारत-रत्न के मकान ध्वस्तीकरण से VDA-प्रशासन का संबंध नहीं:फेसबुक और एक्स पर की जा रही पोस्ट पर वीडीए सचिव ने दी सफाई
वाराणसी में शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुश्तैनी मकान के जीर्णोद्वार का मामला गरमा गया है। लगातार फेसबुक और एक्स प्लेटफार्म पर इसे लेकर पोस्ट डाली जा रही है। ऐसे में वीडीए सचिव वेद प्रकाश मिश्रा ने सूचना विभाग जरिए जानकारी दी है कि भारत रत्न के मकान को गिराने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निजी है और इसे उस्ताद के वारिसों द्वारा अपनी मर्जी से कराया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई में वाराणसी विकास प्राधिकरण या जिला प्रशासन की कोई भूमिका, दखल या सहभागिता नहीं है। सोशल मीडिया पर चल रही सरकारी कार्रवाई की बातें पूरी तरह निराधार हैं। सोशल मीडिया पर उठीं थीं अफवाहें, वीडीए ने कराई जांच वीडीए के सचिव वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि सोशल मीडिया (जैसे एक्स और फेसबुक) पर इस ऐतिहासिक मकान के ध्वस्तीकरण को लेकर लगातार शिकायतें और चिंताएं जताई जा रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण ने तुरंत इसकी विस्तृत जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि चौक क्षेत्र के भीखाशाह गली (सराय हड़हा) में स्थित मकान संख्या सीके 46/63 उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पौत्र मोहम्मद सिब्तैन (स्वर्गीय महताब हुसैन के पुत्र) का है। करीब 500 वर्गफीट के दायरे में बना यह दो मंजिला (जी+1) भवन बेहद पुराना और जर्जर हो चुका था, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ था। धरोहर को सहेजने के लिए बनेगा म्यूजियम सचिव वेद प्रकाश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जर्जर होने के कारण परिवार के सदस्य स्वयं इस मकान का नवीनीकरण (रिनोवेशन) करा रहे हैं। नए सिरे से मजबूत निर्माण करने के उद्देश्य से ही पुराने ढांचे को गिराया जा रहा है। इसी बीच एक बेहद सुखद और महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। परिवार के सदस्यों ने प्रशासन को बताया है कि वे इस स्थान पर नया भवन बनाने के बाद भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की याद में एक भव्य म्यूजियम (संग्रहालय) स्थापित करेंगे। इस कदम से शहनाई के जादूगर की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत और उनकी यादों को हमेशा के लिए संरक्षित किया जा सकेगा। प्रशासन या वीडीए का कार्रवाई से कोई संबंध नहीं वीडीए सचिव ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि इस मकान को गिराने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निजी है और इसे उस्ताद के वारिसों द्वारा अपनी मर्जी से कराया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई में वाराणसी विकास प्राधिकरण या जिला प्रशासन की कोई भूमिका, दखल या सहभागिता नहीं है।

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