हरदोई में बाढ़ से घिरे ग्रामीणों का छलका दर्द:बिलग्राम के राजघाट को पक्का और बांध बनाने की मांग
हरदोई की बिलग्राम तहसील अंतर्गत गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का प्रकोप हर साल ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे चिरंजू पुरवा और राजघाट क्षेत्र के लोग इन दिनों भीषण संकट के दौर से गुजर रहे हैं। गंगा के उफान के चलते राजघाट जलमग्न है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ के कारण बेघर हुए ग्रामीण सड़क किनारे या ऊंची जगहों पर पॉलिथीन तानकर शरण लेने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन्हें खाने-पीने और अन्य जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी राम प्रकाश, नेकराम, तिलक रामसनेही, मदनपाल, लेखपाल, कुसमा रानी और महेंद्र ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि हर साल बरसात के दिनों में उन्हें अकल्पनीय कष्टों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पक्का राजघाट और सुरक्षात्मक बांध बनाए जाने की मांग बहुत पुरानी है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के नेता वोट मांगने आते हैं तो बड़े-बड़े आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद कोई सुधि नहीं लेता। क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि नेताओं के साथ-साथ जिला प्रशासन भी इस गंभीर समस्या के प्रति पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का दृढ़ मानना है कि यदि राजघाट पर पक्के घाट का निर्माण और गंगा किनारे मजबूत बांध (बंधा) बनवा दिया जाए, तो हर साल आने वाली इस आपदा से काफी हद तक राहत मिल सकती है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनकी इस जनहितैषी समस्या का स्थायी समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए, ताकि उन्हें हर साल बाढ़ के तांडव से मुक्ति मिल सके।
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