भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर फिर फंसा पेंच
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद अभी अधर में लटका हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ लाभ की गारंटी नहीं मिलती, तब तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 27 जून 2026
अंतिम चरण में पहुंची व्यापार वार्ता
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संकेत दे रहे हैं कि समझौता जल्द ही आकार ले सकता है, लेकिन एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति न बनने के कारण अभी भी अंतिम हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन भारत अपनी आर्थिक और व्यापारिक प्राथमिकताओं से समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
टैरिफ लाभ पर अटका मामला
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ व्यवस्था मिले। भारत का मानना है कि यदि भारतीय वस्तुओं पर वही शुल्क लागू होगा जो वियतनाम, बांग्लादेश या अन्य निर्यातक देशों के उत्पादों पर लगाया जाता है, तो इस समझौते का वास्तविक लाभ कम हो जाएगा।उन्होंने कहा कि जिस दिन अमेरिका भारत को इस संबंध में स्पष्ट और भरोसेमंद व्यवस्था देने का रास्ता निकाल लेगा, उसी दिन समझौता आगे बढ़ सकता है।
भारतीय निर्यातकों के हित सर्वोपरि
भारत विशेष रूप से वस्त्र, दवा, इंजीनियरिंग उत्पाद और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के लिए बेहतर बाजार पहुंच चाहता है। सरकार का मानना है कि व्यापार समझौते का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति दिलाना भी है। यदि भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम शुल्क का लाभ मिलता है, तो इससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
18 प्रतिशत टैरिफ व्यवस्था पर भी सवाल
गोयल ने पहले से चर्चा में रहे 18 प्रतिशत टैरिफ ढांचे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस व्यवस्था को इसलिए स्वीकार किया था क्योंकि उस समय इसे तुलनात्मक लाभ के आधार पर देखा गया था।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अन्य देशों को समान या उससे बेहतर टैरिफ रियायतें मिलने लगती हैं, तो भारत के लिए यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से अपना महत्व खो देती है। ऐसी स्थिति में पहले की सहमति स्वतः कमजोर पड़ जाती है।
फरवरी से जारी है बातचीत
दोनों देशों के बीच इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया 6 फरवरी 2026 से तेज गति से चल रही है। कई दौर की वार्ताओं के बाद अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन टैरिफ लाभ से जुड़ा प्रश्न अब भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।भारत का रुख है कि किसी भी समझौते का मूल्यांकन राष्ट्रीय हित और व्यापारिक लाभ के आधार पर किया जाएगा।
समझौते में क्या-क्या हो सकता है शामिल
प्रस्तावित व्यापार समझौते में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना है। इनमें टैरिफ व्यवस्था, मूल नियम, निवेश प्रोत्साहन, तकनीकी सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारिक सुगमता बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।यह समझौता दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका और दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था भारत के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़ेंगे, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भी भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में यह व्यापार समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।
गारंटी मिलने पर खुल सकता है रास्ता
फिलहाल पूरा मामला अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को मिलने वाले वास्तविक टैरिफ लाभ पर टिका हुआ है। भारत ने साफ संकेत दिया है कि केवल औपचारिक समझौते के लिए समझौता नहीं किया जाएगा। जब तक भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित नहीं होती, तब तक नई व्यापार संधि पर अंतिम मुहर लगने की संभावना कम है।दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान निकल सकता है।