कालिंदी घाट पर बनारस की तरह मां काली की आरती:गंगा उत्सव में क्विज और नुक्कड़ नाटक से नदी संरक्षण का संदेश; नदी तट पर पार्क का शिलान्यास
एटा में राष्ट्रीय नदी दिवस पर बुधवार को कालिंदी घाट पर गंगा उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम शाम 4 बजे शुरू होकर रात 8 बजे तक चला। वाराणसी से आए कलाकारों ने बनारस की तर्ज पर मां कालिंदी की आरती की। दीपों और मंत्रोच्चार के बीच हुई आरती उत्सव का मुख्य आकर्षण रही। कार्यक्रम में नदी संरक्षण, सफाई और जल स्रोतों को बचाने का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में लिया हिस्सा उत्सव में अलग-अलग स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने नीराथॉन, गंगा क्विज, ड्रॉइंग, पेंटिंग और नुक्कड़ नाटक में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने नदियों के महत्व, जल संरक्षण, नदी की सफाई और पर्यावरण बचाने के प्रति लोगों को जागरूक किया। घाट के विकास और सौंदर्यीकरण पर जोर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता रहे। मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, प्रेमपाल सिंह और माय भारत की जिला युवा अधिकारी उपासना सिरोही विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक भी मौजूद रहे। प्रमोद गुप्ता ने कहा कि एटा में पहले इस तरह के आयोजन नहीं होते थे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद काली नदी के घाट पर हर साल गंगा आरती हो रही है। नदी संरक्षण और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां भी लगातार आयोजित की जा रही हैं। विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने काली नदी के घाट को विकसित कर आकर्षक और भव्य स्वरूप देने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि काली नदी क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। इस दौरान उन्होंने नदी तट पर प्रस्तावित पार्क का शिलान्यास भी किया। उन्होंने घाट पर सांस्कृतिक, धार्मिक और जनजागरूकता से जुड़े आयोजन नियमित रूप से कराने पर जोर दिया। नमामि गंगे और वन विभाग ने संभाली जिम्मेदारी कार्यक्रम का संचालन माय भारत के प्रतिनिधि सौरव कुमार और प्रांजल कुमार ने किया। आयोजन की व्यवस्थाओं और गतिविधियों के संचालन में नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी आर्यन गौड़ तथा वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी केके जैन और वन दरोगा पिंकी कुमार ने भूमिका निभाई। माय भारत, नमामि गंगे और वन विभाग के समन्वय से कार्यक्रम संपन्न हुआ। उत्सव के माध्यम से संदेश दिया गया कि नदियों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति और खासकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
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