कौशांबी में 247 साल पुराना कुप्पी युद्ध:राम की सेना ने रावण को हराया, भगवा और काले वस्त्रों में आमने-सामने आईं दोनों सेनाएं
कौशांबी के दारानगर में दशहरे के दूसरे दिन बुधवार को करीब 247 साल पुरानी कुप्पी युद्ध की परंपरा का सजीव मंचन किया गया। शाम 4 बजे शुरू हुआ यह पारंपरिक युद्ध करीब 6 बजे तक चला। इसमें राम और रावण की सेनाएं आमने-सामने आईं। परंपरा के अनुसार, अंतिम युद्ध में भगवान श्रीराम की सेना विजयी हुई और रावण का अंत हुआ। इसके बाद युद्ध मैदान ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा। भगवा और काले वस्त्रों में युद्ध करती हैं दोनों सेनाएं दारानगर का कुप्पी युद्ध रामलीला महोत्सव की अनूठी परंपरा है। इसमें राम की सेना भगवा रंग के वस्त्र पहनती है, जबकि रावण की सेना काले वस्त्रों में मैदान में उतरती है। दोनों सेनाएं प्लास्टिक के घड़ों, जिन्हें कुप्पी कहा जाता है, से एक-दूसरे पर प्रहार करती हैं। इस तरह पारंपरिक युद्ध का सजीव मंचन किया जाता है। पहले दिन रावण की सेना, दूसरे दिन राम की जीत परंपरा के अनुसार, दो दिवसीय कुप्पी युद्ध दशहरे के दिन शुरू होता है और अगले दिन एकादशी तक चलता है। पहले दिन की लड़ाई में रावण की सेना की जीत होती है, जबकि दूसरे दिन अंतिम युद्ध में भगवान श्रीराम के बाण से रावण का वध होता है। इसके साथ ही राम की सेना को विजयी घोषित किया जाता है। कई जिलों से पहुंचते हैं हजारों दर्शक इस अनूठे युद्ध को देखने के लिए हर साल कौशांबी के अलावा आसपास के कई जिलों से हजारों लोग दारानगर पहुंचते हैं। मेला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात रहे। सीओ सिराथू, एसडीएम सिराथू, अन्य प्रशासनिक अधिकारी और मेला कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। मेला कमेटी के संरक्षक मूल प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में दशमी के दिन रावण दहन किया जाता है, लेकिन दारानगर में कुप्पी युद्ध की परंपरा के तहत एकादशी के दिन रावण का वध होता है।
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