गाजीपुर में सपा के पुराने चुनावी रिकॉर्ड पर पूर्व सांसद:राधेमोहन सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 27 वोटों का हिसाब मांगा
गाजीपुर में वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव के बीच सपा के पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने फेसबुक पर वीडियो जारी कर सांसद अफजाल अंसारी और पार्टी के पुराने चुनावी रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सपा प्रत्याशी को 47 में से सिर्फ 20 वोट मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बाकी 27 वोट कहां गए। राधेमोहन सिंह ने विधान परिषद चुनाव में सपा प्रत्याशी मदन यादव को मिले 632 वोटों का भी जिक्र किया।
लाल टोपी और संविधान की बात पर घेरा
राधेमोहन सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी आज लाल टोपी, झंडे और संविधान की बात करती है, लेकिन पुराने चुनावों में इन सिद्धांतों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने जिला पंचायत सदस्यों की राजनीतिक भूमिका और उनके भविष्य को लेकर भी सवाल किए। उनके मुताबिक, जिन सदस्यों को राजनीति में आगे बढ़ना था, उनकी भूमिका और महत्व को नजरअंदाज क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से सदस्यों की राजनीतिक साख पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
वोट चोरी के आरोप पर भी साधा निशाना
पूर्व सांसद ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी पुराने चुनावों से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे पा रही है, तो उसे भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाने से पहले अपने चुनावी रिकॉर्ड पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने गाजीपुर के जिला पंचायत चुनाव के घटनाक्रम को वोटों के कथित हेरफेर से जोड़ते हुए इसे जिले के लिए शर्मनाक बताया। राधेमोहन सिंह ने अफजाल अंसारी और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के झंडे, टोपी और राजनीतिक अस्मिता की बात करने वालों को अपने पुराने चुनावी घटनाक्रम पर भी जवाब देना चाहिए।
सुनील यादव की बगावत के बीच गरमाई सियासत
वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर सपा के बागी प्रत्याशी सुनील यादव के चुनाव लड़ने के बीच राधेमोहन सिंह का यह बयान सामने आया है। पूर्व सांसद के मुताबिक, अफजाल अंसारी ने सुनील यादव से चुनाव से हटने का अनुरोध किया था। इसके बाद सुनील यादव ने पुराने चुनावों को लेकर सवाल उठाए, जिन्हें अब राधेमोहन सिंह ने अपने वीडियो में प्रमुखता से उठाया है।
भाजपा और सपा के प्रत्याशी मैदान में
एमएलसी चुनाव में भाजपा ने स्नातक सीट पर केदार सिंह और शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, सपा के आधिकारिक उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। ऐसे में सुनील यादव की बगावत और राधेमोहन सिंह के आरोपों के बाद गाजीपुर में सपा के पुराने चुनावी रिकॉर्ड को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पूर्व सांसद की ओर से उठाए गए सवालों और वोटों में कथित हेरफेर के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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