खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी:स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

Nov 05, 2026 - 13:40
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खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी:स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
स्वस्थ शरीर, सकारात्मक सोच और मानवीय संवेदनाएं... बेहतर समाज की बुनियाद हैं। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। इसी सोच के साथ खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज, चौक में बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। ‘ह्यूमैनिटी, हेल्थ एंड वेल-बीइंग इन कंटेंपररी सोसाइटी : एन इंटरडिसिप्लिनरी पर्सपेक्टिव्स’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार रखे। सामाजिक जिम्मेदारी का विकास जरूरी लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि शिक्षा में मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास जरूरी है। ऐसी संगोष्ठियां शोध और सामाजिक समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण मंच हैं। केजीएमयू के वक्ष शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र यादव ने प्रदूषण और बदलती जीवनशैली से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने समय पर रोगों की पहचान और निवारक चिकित्सा को जरूरी बताया। डॉ. आरके सिंह ने कहा कि असंतुलित खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोगों का खतरा बढ़ाते हैं। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से बचाव संभव है। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के डॉ. देवदत्त चतुर्वेदी ने वैज्ञानिक अनुसंधान और रसायन विज्ञान के माध्यम से स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान पर प्रकाश डाला। देश और शरीर को दें एक-एक घंटा समाजवादी विचारक दीपक मिश्रा ने कहा कि देश की प्रगति बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है। भारत की स्वास्थ्य सेवाएं इतनी बेहतर होनी चाहिए कि विकसित देशों के लोग भी यहां उपचार कराने आएं। उन्होंने प्रतिदिन देश और अपने शरीर को एक-एक घंटा देने की अपील की। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना शुक्ला ने सकारात्मक सोच और आत्मविकास को मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया। कहा कि दूसरों के साथ हंसें, उन पर नहीं। प्राचार्या प्रो. अंशु केडिया ने स्वागत किया। डॉ. विजेता दीक्षित ने विषय परिचय और प्रो. डीके अवस्थी ने मुख्य थीम पर विचार रखे। प्रो. सुजाता देव ने छात्राओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक किया। पहले दिन तीन समानांतर ऑफलाइन और ऑनलाइन सत्र आयोजित हुए।

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