मेरठ जेल में बंद मुस्कान-रविता करवाचौथ का व्रत रखेंगी:NGO से लिया लाल बिंदी, चूड़ी और श्रृंगार का सामान, अन्य 37 महिलाएं भी करेंगी व्रत
मेरठ की जिला जेल में बंद मुस्कान करवाचौथ का व्रत करेंगी। दोनों ने ही अपने लिए लाल चूड़ियां, लाल बिंदी और श्रृंगार का सामान लिया है। जेल में सामाजिक कार्य करने वाली संजीवनी महिला संस्था ने इन दोनों को ये सामान दिए हैं। संस्था की टीम करवाचौथ से पहले महिला बंदियों को पूजा और श्रृंगार का सामान बांटने जेल पहुंची थी। तब मुस्कान के साथ रविता ने भी श्रृंगार का सामान मांगा और उन्हें संस्था ने वो सामान वितरित किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सांपकांड वाली रविता और नीलेड्रम वाली मुस्कान भी आज करवाचौथ का व्रत करेंगी। जेल प्रशासन के मुताबिक, महिला बंदियां चाहें तो करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के अनुसार पूजा और फलाहार की व्यवस्था की जाती है, लेकिन जिन मामलों में पति-पत्नी का संबंध नहीं है, उनमें मुलाकात की अनुमति नहीं दी जाती। अहोई अष्टमी का व्रत भी करेंगी मुस्कान-रवित मेरठ जिला जेल में 37 महिला बंदियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखने का फैसला किया है। इसके अलावा, जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी सहित कई महिला कैदियों ने अपने बच्चों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखने की इच्छा भी जताई है। मुस्कान-रविता ने मांगी चूड़ी-बिंदी सोमवार को संजीवनी महिला संस्था की निशी जैन अपनी टीम के साथ जिला जेल पहुंचीं। टीम महिला बंदियों को करवाचौथ की पूजा के लिए मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान देने आई थी। इस दौरान बंदियों से उनकी जरूरत की चीजें भी पूछी गईं। निशी जैन ने बताया कि मुस्कान और रविता ने चूड़ी, बिंदी समेत श्रृंगार का सामान मांगा है। संस्था उन्हें उनकी मांग के अनुसार सामान दे रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्कान और रविता व्रत रखेंगी या नहीं और किसके लिए पूजा करेंगी, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इस मुद्दे पर उनकी बंदियों से बातचीत भी नहीं हुई है। सालों से जेल में सामाजिक काम कर रही संस्था निशी जैन के मुताबिक, संजीवनी महिला संस्था लंबे समय से महिला जेल में सामाजिक कार्य कर रही है। संस्था की ओर से महिला बंदियों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही, उनके बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम किया जाता है। करवाचौथ से पहले संस्था महिला बंदियों को पूजा और श्रृंगार की सामग्री उपलब्ध करा रही है, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार त्योहार मना सकें। जेल में व्रत और पूजा की क्या है व्यवस्था? वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल में बंद महिलाएं चाहें तो करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के अनुसार उनके लिए फलाहार और पूजा की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि अगर पति-पत्नी दोनों जेल में बंद हैं और करवाचौथ पर पूजा करना चाहते हैं, तो नियमानुसार उनकी मुलाकात कराई जाती है। जिन महिला बंदियों के पति बाहर हैं, उनके मिलने आने पर दोपहर में मुलाकात की व्यवस्था की जाती है। इसी तरह, पुरुष बंदियों की पत्नियां जेल आकर पूजा करना चाहें तो नियमानुसार मुलाकात कराई जाती है। पति की फोटो या निशानी रखकर भी करती हैं पूजा जेल अधीक्षक के मुताबिक, कुछ महिला बंदियों के पति दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसी महिलाएं पति की फोटो या उनकी किसी निशानी को देखकर भी पूजा करती हैं। जेल में व्रत और पूजा की व्यवस्था नियमों के अनुसार की जाती है और बंदियां अपनी इच्छा के मुताबिक व्रत रख सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साहिल-मुस्कान और रविता-अमरदीप जैसे मामलों में यदि संबंधित महिला और पुरुष के बीच पति-पत्नी का संबंध नहीं है, तो उनकी मुलाकात नहीं कराई जा सकती।
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