महंगी हुई दिवाली की पूजा सामग्री:उन्नाव में चीनी के खिलौने 40 रुपए और गट्टा 40 रुपए किलो तक महंगा हुआ

Nov 04, 2026 - 12:42
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महंगी हुई दिवाली की पूजा सामग्री:उन्नाव में चीनी के खिलौने 40 रुपए और गट्टा 40 रुपए किलो तक महंगा हुआ
उन्नाव में दिवाली की पूजा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्री के दाम पिछले साल के मुकाबले बढ़ गए हैं। चीनी के खिलौने और गट्टे की कीमत में सबसे ज्यादा 40 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। वहीं लइया, खील और चूरा भी महंगे हो गए हैं। चीनी की कीमत 65 रुपए किलो तक पहुंचने से पारंपरिक मिठाइयों और पूजन सामग्री की लागत बढ़ी है। इसका असर अब बाजार में बिकने वाली सामग्री के दामों पर दिख रहा है। चीनी के खिलौने 80 से 120 रुपए किलो हुए दिवाली पर पूजा में इस्तेमाल होने वाले चीनी के खिलौनों की कीमत पिछले साल 80 रुपए प्रति किलो थी, जो इस बार बढ़कर 120 रुपए हो गई है। इसी तरह गट्टा 70 से बढ़कर 110 रुपए किलो बिक रहा है। लइया के दाम 50 से बढ़कर 60 रुपए और चूरा 60 से 70 रुपए किलो हो गया है। खील की कीमत में भी 10 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल और इस साल के दाम लोकनगर के कारखाने से जिलेभर में सप्लाई शहर के लोकनगर में बताशे, चीनी के खिलौने, गट्टे और पेठा बनाने का कारखाना संचालित है। यहां तैयार होने वाली पारंपरिक मिठाइयां और पूजन सामग्री जिले के अलग-अलग बाजारों में भेजी जाती हैं। दिवाली के दौरान मांग बढ़ने से कारखाने में कामकाज तेज हो जाता है। पूजा की थाली से लेकर घरों में होने वाली पूजा तक में इन वस्तुओं का इस्तेमाल होता है। चीनी महंगी होने से इनके उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है। अजगैन की खील मंडी से कानपुर-लखनऊ तक कारोबार अजगैन रेलवे क्रॉसिंग के पास लगने वाली खील मंडी दिवाली के दौरान खास पहचान रखती है। यहां पुरवा क्षेत्र में पैदा होने वाले खास किस्म के चावल से खील तैयार की जाती है। इसे खरीदने के लिए कानपुर और लखनऊ समेत कई शहरों के व्यापारी पहुंचते हैं। त्योहार नजदीक आते ही मंडी में कारोबार बढ़ जाता है। इस बार खील के दाम भी 150 से बढ़कर 160 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। पूजा की थाली से मिठाइयों तक बढ़ा खर्च दिवाली पर खील, लइया, गट्टा और चीनी के खिलौनों की मांग बढ़ जाती है। घरों में पूजा के अलावा बाजारों में सजने वाली पूजन थालियों में भी इनका इस्तेमाल होता है। ऐसे में इनकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर त्योहार की खरीदारी पर पड़ रहा है। लोगों को इस बार पूजा की सामग्री और पारंपरिक मिठाइयों के लिए पिछले साल से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

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