नैमिषारण्य 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर हरिशंकरी पौधारोपण अभियान शुरू:हरदोई में नैमिष धाम के परिक्रमा मार्ग पर 25 पड़ावों पर रोपे गए पीपल,बरगद और पाकर के पौधे

Oct 26, 2026 - 18:35
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नैमिषारण्य 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर हरिशंकरी पौधारोपण अभियान शुरू:हरदोई में नैमिष धाम के परिक्रमा मार्ग पर 25 पड़ावों पर रोपे गए पीपल,बरगद और पाकर के पौधे
हरदोई में नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर धार्मिक परंपराओं को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से 26 अक्टूबर सोमवार को शाम 4. 30 बजे हरिशंकरी पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। 24 से 29 अक्टूबर तक आयोजित इस अभियान की शुरुआत 24 अक्टूबर को नैमिषारण्य के चक्रतीर्थ से हुई। इसके तहत हरदोई जिले की सीमा में आने वाले 25 कोस पड़ावों पर पीपल, बरगद और पाकर के पौधे रोपे गए। अभियान के दौरान बालामऊ विधायक एवं पूर्व मंत्री रामपाल वर्मा, अहिरोरी ब्लॉक प्रमुख धर्मवीर सिंह पन्ने, हरदोई क्षेत्र के कोस पड़ाव प्रभारी अभय शंकर गौड़ एडवोकेट, लोक भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह, अवध क्षेत्र अध्यक्ष कमलेश कुमार सिंह और अश्विनी सिंह सहित अन्य लोग शामिल हुए। नैमिषारण्य के संतों और संबंधित गांवों के लोगों की उपस्थिति में मंत्रोच्चार के साथ पौधारोपण किया गया। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का धार्मिक महत्व प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, यह परिक्रमा क्षेत्र सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों और ऋषियों की तपस्थली से संबंधित है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक कोस पड़ाव पर हरिशंकरी के पौधे लगाने की पहल की गई है। हरिशंकरी में पीपल, बरगद और पाकर के वृक्ष शामिल हैं। हरदोई जिले की सीमा में गोमती नदी पार करने के बाद परिक्रमा मार्ग के लगभग 75 किलोमीटर क्षेत्र में 25 कोस पड़ाव आते हैं। इनमें हर्रैया, जनगांव, हत्याहरण, कोथावा रेन बसेरा, गिरधरपुर, उमरारी, हास बरौली, वाजिदपुर, गोपालपुर और शेखवापुर सहित अन्य स्थान शामिल हैं। इन पड़ावों पर पौधारोपण कर धार्मिक विरासत के साथ हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान से जुड़े अभय शंकर गौड़ ने बताया कि वर्ष 2011 में शिव शंकर डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से जनसहयोग लेकर परिक्रमा मार्ग के दोनों ओर 10 हजार पौधे लगाए गए थे। वर्तमान अभियान में भी ग्रामीणों ने पौधों के संरक्षण और रखरखाव में भरपूर सहयोग देने का संकल्प लिया है। आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े इस मार्ग पर हरियाली बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण की परंपरा को मजबूत करना है।

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