पीईटी परीक्षा: सैकड़ों किमी दूर सेंटर से भड़के जेन-ज़ी:वोट के लिए घर के पास बूथ, नौकरी के लिए 500 किलोमीटर दूर सेंटर क्यों?

Oct 30, 2026 - 06:14
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पीईटी परीक्षा: सैकड़ों किमी दूर सेंटर से भड़के जेन-ज़ी:वोट के लिए घर के पास बूथ, नौकरी के लिए 500 किलोमीटर दूर सेंटर क्यों?
'वोट चाहिए तो घर के बगल में पोलिंग बूथ बन जाता है, लेकिन जब नौजवानों को नौकरी की परीक्षा देनी हो तो 400 से 500 किलोमीटर दूर फेंक दिया जाता है।' यूपी पीईटी (PET) परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों के मन में यह आक्रोश साफ झलक रहा है। बरेली जंक्शन के फर्श पर चादर बिछाए रात गुजारने को मजबूर युवा पीढ़ी यानी Gen-Z अब व्यवस्था के रवैये से बेहद खफा है। छात्रों का कहना है कि सरकार के ऐसे ही रवैये का नतीजा हाल ही में नेपाल और दिल्ली जैसे आंदोलनों में युवाओं के गुस्से के रूप में सामने आ चुका है। परीक्षा केंद्रों की दूरी, ट्रेनों में भारी धक्का-मुक्की और बार-बार पेपर लीक की आशंकाओं के बीच अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा साझा की। सुल्तानपुर के अमित ने बयां किया दर्द: 'नेपाल और दिल्ली में दिख चुका है Gen-Z का गुस्सा' सुल्तानपुर के रहने वाले छात्र अमित ने बातचीत में व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि चुनावों के समय सरकार अपनी सुविधा के लिए घर के पास पोलिंग बूथ स्थापित कर देती है, लेकिन जब युवाओं की बारी आती है तो उन्हें 400 से 500 किमी दूर भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को मजबूर न करे; Gen-Z की ताकत और आक्रोश का असर दिल्ली से लेकर पड़ोसी देश नेपाल के सत्ता परिवर्तन तक में देखा जा चुका है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद अब मजबूरी में नॉन-टेक्निकल परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अमित ने बताया कि उनका एक अन्य रेलवे जेई का केंद्र भी 500 किमी दूर आगरा पड़ा था, जिसे दूरी के चलते उन्हें छोड़ना पड़ा। दिल्ली से आईं संध्या गुप्ता: 'सरकार से अब कोई उम्मीद नहीं बची' दिल्ली से परीक्षा देने पहुंचीं संध्या गुप्ता का सेंटर बदायूं पड़ा है। ट्रेन की भारी भीड़ और धक्के खाकर वह किसी तरह बरेली जंक्शन पहुंचीं और सुबह बदायूं जाने के लिए स्टेशन के फर्श पर ही रात बिता रही हैं। संध्या ने अपनी मायूसी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार से अब किसी भी तरह की मांग या उम्मीद नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग का कोर्स करने के बाद भी पीईटी देना अनिवार्य है। कटऑफ इतनी ऊंची रहती है और बेरोजगारी का यह हाल है कि इंटरव्यू और डिग्रियों की कोई कद्र नहीं बची है। बार-बार परीक्षा देने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ रहा है। अयोध्या से आए मनोज कुमार: 'स्पेशल ट्रेनों के दावे खोखले, फर्श पर सोने को मजबूर' अयोध्या से बरेली पहुंचे मनोज कुमार ने बताया कि परीक्षा के नाम पर स्पेशल ट्रेनें चलाने के सरकार के तमाम दावे हकीकत से कोसों दूर हैं। जनरल टिकट लेकर आए छात्र स्लीपर और एसी कोचों में ठुंस कर आने को विवश हैं, जहां टीटीई से डांट खानी पड़ती है। एक बच्चे के पिता मनोज सोलर का काम करते हैं और उनका कहना है कि दूर-दराज आने-जाने में भारी किराया खर्च हो जाता है, ऐसे में होटल या धर्मशाला लेने की आर्थिक स्थिति नहीं होती। उन्होंने मांग की कि परीक्षा केंद्र गृह जनपद से सटे अधिकतम 1-2 जिलों के दायरे में ही होने चाहिए। अमेठी के अनूप शुक्ला और गंगादीन: 'सफर की थकान में ही टूट जाती है पढ़ाई' अमेठी से लगभग 450 किलोमीटर का सफर तय कर बरेली पहुंचे अनूप शुक्ला ने बताया कि इतनी लंबी यात्रा की थकान और परेशानी से तैयारी पूरी तरह बाधित हो जाती है। वहीं, अमेठी के ही गंगादीन जो पिछले 5-6 सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि पहले केंद्र लखनऊ जैसे पास के जिलों में मिल जाता था, लेकिन अब बेवजह सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है। गाजीपुर के धीरज यादव और अयोध्या के अक्षय यादव ने भी कहा कि 300 से 400 किलोमीटर दूर सेंटर भेजने के बजाय 80-90 किलोमीटर के दायरे में परीक्षा आयोजित होनी चाहिए ताकि युवाओं को इस तरह प्लेटफॉर्म पर न भटकना पड़े। बरेली में 23 केंद्रों पर आज परीक्षा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम बरेली जिले में पीईटी परीक्षा शुक्रवार को दो पालियों में 23 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है, जिसमें कुल 62,024 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। परीक्षा की पहली पाली सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3:00 से 5:00 बजे तक चलेगी। परीक्षा को पूरी तरह नकल विहीन और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चुस्त की गई है और एडीएम सिटी डॉ. अविनाश त्रिपाठी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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