प्रवासी पक्षियों का यमुना किनारे आना शुरू:मथुरा में साइबेरिया, रूस, मध्य एशिया और यूरोप से आए पक्षी दिखे
मौसम में बदलाव और सर्दियों की आहट के साथ ही धर्मनगरी मथुरा में यमुना नदी के किनारे विदेशी मेहमानों यानी प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। साइबेरिया, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे इलाकों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर आने वाले ये पक्षी यमुना की जलधारा में अठखेलियां करते नजर आने लगे हैं।शनिवार सुबह भारी तादात में पानी में तैरते, गोता लगाते और झुंड बनाकर विचरण करते इन पक्षियों की मौजूदगी यमुना के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालु और पर्यटक भी इनकी खूबसूरती को निहार रहे हैं। दरअसल, सर्दियों के मौसम में उत्तरी और मध्य भारत की नदियां, झीलें तथा जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल ठिकाने बन जाते हैं। साइबेरिया और आसपास के क्षेत्रों में तापमान अत्यधिक गिरने, जलस्रोतों पर बर्फ जमने और भोजन की उपलब्धता कम होने के कारण ये पक्षी गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं। मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में यमुना की जलधारा और आसपास के शांत स्थान इन्हें भोजन तथा विश्राम के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। प्रवासी पक्षियों की प्रमुख प्रजातियों में सुर्खाब, बार हेडेड गूज, नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन टील, गैडवाल और यूरेशियन विजन जैसी प्रजातियां उत्तर भारत के जलक्षेत्रों में सर्दियों के दौरान देखी जाती हैं। इनमें कुछ पक्षियों की लंबी गर्दन और आकर्षक रंग इन्हें अलग पहचान देते हैं, जबकि कुछ छोटे आकार के पक्षी पानी में तेजी से तैरने और गोता लगाने के लिए जाने जाते हैं। ये पक्षी जलीय वनस्पतियों, छोटे जलीय जीवों, कीटों और बीजों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। यमुना में इन पक्षियों की अठखेलियां लोगों को प्रकृति के करीब होने का एहसास करा रही हैं। कई पर्यटक मोबाइल कैमरों से इन खूबसूरत नजारों को कैद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में तापमान गिरने के साथ इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इस समय देखे गए पक्षियों की प्रजातियों और संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास में शांति बनाए रखना भी जरूरी है।
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