पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज:केंद्रीय संघर्ष समिति ने बुलंदशहर और हापुड़ में रथ यात्रा निकालकर लोगों को किया जागरूक

Oct 28, 2026 - 17:45
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पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज:केंद्रीय संघर्ष समिति ने बुलंदशहर और हापुड़ में रथ यात्रा निकालकर लोगों को किया जागरूक
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को पश्चिमी यूपी के 22 जिलों और तहसीलों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया। हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के निर्णय के तहत वकीलों ने न्यायालयों में काम नहीं किया। मेरठ बार एसोसिएशन ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए जिला प्रशासन और संबंधित न्यायालयों से सहयोग मांगा था। बुधवार को हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर बुलंदशहर और हापुड़ में रथ यात्रा निकाली गई। हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम के नेतृत्व में यह रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा के जरिए लोगों को हाईकोर्ट बेंच की मांग के प्रति जागरूक किया गया। अधिवक्ताओं ने “बेंच नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए लोगों से आंदोलन में साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। इसके लिए आम जनता का सहयोग जरूरी है। रथ यात्रा के माध्यम से लोगों से इस मांग को समर्थन देने और अधिवक्ताओं के आंदोलन से जुड़ने की अपील की गई। हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में मेरठ के अधिवक्ताओं ने भी भाग लिया। इनमें राघव शर्मा, शुभम शर्मा, उदित गर्ग, निखिल, संजीव कुमार, शाहनवाज, शाहरुख, टीटू राणा और शिवा शामिल रहे। रथ यात्रा के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को आगे बढ़ाया गया। हर महीने के प्रत्येक बुधवार को रहेगा कार्य बहिष्कार हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की 7 अक्टूबर 2026 को सहारनपुर बार एसोसिएशन के आतिथ्य में कचहरी परिसर स्थित सभागार में बैठक हुई थी। बुधवार सुबह 11 बजे हुई इस बैठक में प्रस्ताव संख्या-2 के तहत पहले लिए गए निर्णय को जारी रखने का फैसला किया गया। इसके अनुसार, अगले आदेश तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और तहसीलों की बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता हर महीने के प्रत्येक बुधवार को न्यायालयों में न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। समिति का यह निर्णय हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की रणनीति का हिस्सा है।

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